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अडाणी समूह की बढ़ीं मुश्किलें, अमेरिका में केस दर्ज होने के बाद ग्रुप अब सेबी के रडार पर

अडाणी समूह पर रिश्वतखोरी के आरोप में अमेरिकी कोर्ट में केस दर्ज होने के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। भारत में सेबी इस मामले में जांच कर रहा है कि क्या समूह ने बाजार को प्रभावित करने वाली जानकारी के खुलासे के नियमों का उल्लंघन किया है। सेबी ने अडानी समूह से अमेरिकी मामले और केन्या में एयरपोर्ट डील रद्द होने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। इसके अलावा, स्टॉक एक्सचेंज के अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।

बैंक कर्ज पर लगा सकते हैं अस्थायी रोक

अमेरिका में रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद कुछ बैंकों ने अडाणी समूह को नया कर्ज देने पर रोक लगाने का विचार शुरू कर दिया है। हालांकि, मौजूदा कर्ज की शर्तें बरकरार रहेंगी। आरोपों के बाद अडानी समूह को फंडिंग की कमी का सामना करना पड़ सकता है। रिसर्च फर्म क्रेडिटसाइट्स के अनुसार, समूह के ग्रीन एनर्जी कारोबार में रीफाइनेंसिंग सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय निवेश पर असर की आशंका

इस विवाद के कारण भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक अब अधिक पारदर्शिता और जांच की मांग करेंगे, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय प्रक्रिया धीमी हो सकती है। इस बीच, अडाणी समूह के बॉन्ड्स की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को अडाणी पोर्ट्स के 2029 वाले बॉन्ड की कीमत 2.5 डॉलर घटकर 87.8 डॉलर पर पहुंच गई।

अडानी से नहीं, केंद्र सरकार से था करार- बीजद

ओडिशा में बिजली खरीद को लेकर अडाणी समूह पर लगे आरोपों का बीजू जनता दल ने खंडन किया है। बीजद ने कहा कि यह समझौता केंद्र की ‘मैन्युफैक्चरिंग लिंक्ड सोलर स्कीम’ के तहत दो सरकारी एजेंसियों के बीच हुआ था, न कि अडाणी समूह से। यह सौदा 500 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा खरीदने के लिए था।

नियमों के उल्लंघन पर अमेरिका सख्त

अमेरिका के प्रतिभूति और विनिमय आयोग के प्रवर्तन विभाग के निदेशक संजय वाधवा ने स्पष्ट किया कि अगर प्रतिभूति कानूनों का उल्लंघन होगा, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जवाबदेह ठहराना जारी रखा जाएगा।

दो हफ्तों में सेबी का फैसला

सेबी इस मामले में अगले दो हफ्तों में तथ्यों की जांच पूरी कर यह तय करेगा कि औपचारिक जांच शुरू की जाए या नहीं। यह मामला सिर्फ अडाणी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

क्या है हालिया विवाद

  • दावा किया गया कि ये पूरा मामला अरबों डॉलर के मुनाफे से जुड़ा हुआ है। यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी ऑफिस के मुताबिक, अडानी ने भारत में सोलर एनर्जी से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (करीब 2110 करोड़ रुपए) की रिश्वत देने का वादा किया था। इस प्रोजेक्ट से 20 साल में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा मुनाफे का अनुमान था।
  • अधिकारियों को ये रिश्वत 2020 से 2024 के बीच दिए जाने का आरोप लगाया गया है।इसके साथ ही ये आरोप भी लगाया गया है कि इस मुनाफे के लिए अमेरिका समेत अन्य देशों के निवेशकों और बैंकों से झूठ बोला गया।
  • अडानी ग्रीन एनर्जी ने कॉन्ट्रैक्ट के तहत फंड देने के लिए अमेरिकी इन्वेस्टर्स और अंतर्राष्ट्रीय ऋणदाताओं से कुल 3 बिलियन डॉलर रकम जुटाई।

गौतम अडानी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

  • अमेरिका में सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने इस मामले में गौतम अडानी के भतीजे सागर अडानी , अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारियों समेत एक अन्य फर्म एज्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड के कार्यकारी सिरिल काबेनेस के खिलाफ भी आरोप लगाए हैं।
  • अडानी के अलावा शामिल 7 अन्य लोग सागर अडानी , विनीत एस जैन, रंजीत गुप्ता, साइरिल कैबेनिस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा और रूपेश अग्रवाल हैं।
  • सागर और विनीत अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतम अडानी और सागर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। विनीत जैन 2020 से 2023 तक कंपनी के CEO थे।
  • साइरिल कैबेनिस, सौरभ अग्रवाल, दीपक मल्होत्रा ​​और रूपेश अग्रवाल ने ब्राइबरी (रिश्वत) स्कीम में ग्रैंड ज्यूरी, FBI और US सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) की जांच रोकने की साजिश रची। चारों ने स्कीम से जुड़े ईमेल, मैसेज और एनालिसिस भी मिटाए।

अमेरिका में क्यों दर्ज हुआ मामला

प्रोजेक्ट में अमेरिका के इन्वेस्टर्स का पैसा लगा होने की वजह से अमेरिका में मामला दर्ज हुआ है। अमेरिकी कानून के तहत उस पैसे को रिश्वत के रूप में देना अपराध है। अडानी ने बुधवार को ही 20 ईयर ग्रीन बॉन्ड की बिक्री से 600 मिलियन डॉलर जुटाने की घोषणा की थी। इसके कुछ घंटों बाद ही उन पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

 

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