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पृथ्वी पर जल्द लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर, SpaceX ने लॉन्च किया क्रू-10 मिशन, 9 महीने बाद होगी वापसी

फ्लोरिडा। अमेरिका की भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विलमोर जल्द ही पृथ्वी पर वापस लौटने वाले हैं। वे दोनों करीब 9 महीने से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर फंसे हुए थे। 15 मार्च को स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 रॉकेट द्वारा लॉन्च किए गए क्रू-10 मिशन ने इस वापसी के रास्ते को खोल दिया है। यह मिशन NASA और स्पेसएक्स ने मिलकर लॉन्च किया है।

क्रू-10 मिशन का लॉन्च

15 मार्च को भारतीय समयानुसार सुबह 4:33 बजे, SpaceX का फॉल्कन 9 रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिशन को क्रू-10 नाम दिया गया है। इस मिशन के तहत, चार नए अंतरिक्ष यात्री ISS के लिए रवाना हुए हैं। इनमें NASA की ऐनी मैकक्लेन और निकोल अयर्स, जापानी अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के ताकुया ओनिशी और रूस के रोस्कोस्मोस के किरिल पेसकोव शामिल हैं। यह मिशन NASA के कमर्शियल क्रू प्रोग्राम का हिस्सा है और इसके तहत सुनीता विलियम्स, बुच विलमोर और क्रू-9 के बाकी सदस्यों की जगह लेने वाले हैं।

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी

सुनीता और बुच विलमोर को पहले एक सप्ताह के लिए ISS पर भेजा गया था, लेकिन बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खामियों के कारण उनका मिशन 9 महीने लंबा हो गया। स्पेसक्राफ्ट के थ्रस्टर में तकनीकी खराबियां आईं, जिससे उनका मिशन लंबा खिंच गया। अब क्रू-10 के अंतरिक्ष यात्री कुछ दिनों तक ISS पर एडजस्टमेंट करेंगे और इसके बाद क्रू-9 टीम की वापसी शुरू हो जाएगी।

 

ट्रंप ने मस्क को दी थी जिम्मेदारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में स्पेस एक्स के CEO एलन मस्क को सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को वापस धरती पर लाने की जिम्मेदारी दी थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि, बाइडेन प्रशासन द्वारा इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में छोड़ दिया गया था और मस्क से इनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद जताई थी। मस्क ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि, वे इस काम को जल्द ही करेंगे।

सुनीता और विलमोर को स्पेस स्टेशन पर क्यों भेजा गया था?

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को बोइंग और NASA के संयुक्त ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ पर भेजा गया था। इस मिशन में सुनीता, स्पेसक्राफ्ट की पायलट थीं, जबकि बुच विलमोर मिशन के कमांडर थे। उनका उद्देश्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर 8 दिन रहकर, फिर पृथ्वी पर लौटना था।

इस लॉन्च के समय, बोइंग डिफेंस, स्पेस और सिक्योरिटी के CEO टेड कोलबर्ट ने इसे स्पेस रिसर्च के नए युग की शुरुआत बताया था। मिशन का मुख्य उद्देश्य स्पेसक्राफ्ट की क्षमता को साबित करना था, जिसमें वह अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक ले जा सके और फिर वापस धरती पर ला सके।

इस मिशन के दौरान, सुनीता और विलमोर को स्पेस स्टेशन पर रिसर्च और प्रयोग करने थे। वे पहले ऐसे एस्ट्रोनॉट्स थे जिन्हें एटलस-वी रॉकेट से स्पेस भेजा गया। इसके अलावा, उन्हें स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअल रूप से उड़ाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी। इस फ्लाइट टेस्ट के कई उद्देश्य थे, जिन्हें पूरा करना था।

स्पेस में इतने लंबे समय तक कैसे फंसे?

स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के लॉन्च के समय ही उसमें कई तकनीकी समस्याएं आ गई थीं, जिसके कारण लॉन्च में कई बार देरी हुई। इसके बाद भी स्पेसक्राफ्ट में समस्याएं सामने आईं।

NASA ने बताया कि, स्पेसक्राफ्ट के सर्विस मॉड्यूल में थ्रस्टर में एक हीलियम लीक हो गया था। थ्रस्टर स्पेसक्राफ्ट को रास्ता और गति बदलने में मदद करते हैं। हीलियम गैस के कारण रॉकेट पर दबाव बनता है, जिससे उसका ढांचा मजबूत होता है और फ्लाइट में मदद मिलती है।

लॉन्च के बाद 25 दिनों में स्पेसक्राफ्ट के कैप्सूल में 5 हीलियम लीक हुए, और 5 थ्रस्टर्स काम करना बंद कर दिए थे। इसके अलावा, एक प्रॉपेलेंट वॉल्व पूरी तरह से बंद नहीं हो सका। मिशन के टीम और अमेरिका के ह्यूस्टन में बैठे मैनेजर्स मिलकर भी इन समस्याओं को हल नहीं कर पाए, जिससे मिशन का समय बहुत लंबा हो गया।

 

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