
नई दिल्ली। भारत समेत चार देशों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। ये झटके 3 घंटे के अंदर भारत, नेपाल, पाकिस्तान समेत तिब्बत में महूसस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, नेपाल के लिस्टीकोट में आए भूकंप की तीव्रता 5.5 थी, जिसका असर बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर, सुपौल, कटिहार और पूर्णिया में देखा गया। पाकिस्तान में भी सुबह 5:15 बजे 4.5 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, किसी भी देश में जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। इससे पहले 17 फरवरी को भी बिहार में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
नेपाल में दो बार भूकंप के तेज झटके
पहला झटका देर रात आया : नेपाल में शुक्रवार तड़के दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला भूकंप रात 2:36 बजे आया, जिसका केंद्र बागमती क्षेत्र था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई। झटकों का असर नेपाल के साथ-साथ भारत के बिहार और तिब्बत तक महसूस हुआ।
दूसरा झटका और भी तेज रहा : नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर के अनुसार, दूसरा भूकंप 2:51 बजे आया। इसका केंद्र काठमांडू से 65 किलोमीटर पूर्व सिंधुपालचौक जिले के कोदारी हाईवे पर था। इस बार तीव्रता 6.1 मापी गई, जो पहले झटके से अधिक थी।
नेपाल से बिहार तक धरती कांपी : इन दोनों भूकंपों के झटके नेपाल के काठमांडू घाटी, तिब्बत और भारत के बिहार तक महसूस किए गए। पटना, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया समेत कई जिलों में लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। नेपाल पुलिस के डीआईजी दिनेश कुमार आचार्य ने बताया कि, भूकंप के कारण किसी के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों ने हल्के झटकों की संभावना को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
तिब्बत में भी आया भूकंप
सिलीगुड़ी तक महसूस हुए झटके: नेपाल में आए तेज भूकंप के झटके बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक महसूस किए गए। आधी रात को धरती हिलने से लोग डरकर घरों से बाहर निकल आए।
तिब्बत में भी कांपी धरती : नेपाल में भूकंप के कुछ ही मिनट बाद तिब्बत में भी भूकंप आया। शुक्रवार सुबह 2:48 बजे तिब्बत की धरती हिल गई। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 मापी गई। तिब्बत में हाल ही में आए भूकंप से भारी तबाही हुई थी। ऐसे में फिर से धरती हिलने से लोग दहशत में हैं। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
पाकिस्तान में हिली धरती
नेपाल और तिब्बत के बाद शुक्रवार सुबह 5:14 बजे पाकिस्तान में भी भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 4.5 थी और इसका केंद्र रावलपिंडी रहा। झटके महसूस होते ही लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए।
चार देशों में भूकंप के झटकों के बाद कहीं भी किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, नेपाल और तिब्बत पहले भी भूकंप की तबाही झेल चुके हैं, जिससे लोग अभी भी दहशत में हैं। विशेषज्ञों ने आगे हल्के झटकों की संभावना जताते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?
भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।
कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।
किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है
• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।