
पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुदीप सिंह जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव हैं, लेकिन उन्हें समन्वय जैसा महत्वपूर्ण प्रभार भी दिया गया है। समीता राजौरा की मुख्य पदस्थापना ईको टूरिज्म बोर्ड में सीईओ के पद पर है, वे एपीसीसीएफ वन्यप्राणी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। ये अकेले दो अधिकारी नहीं हैं जो दोहरे-तिहरे प्रभार संभाल रहे हैं बल्कि फील्ड से लेकर वन मुख्यालय तक 50 से अधिक आईएफएस अतिरिक्त प्रभार लिए हुए हैं। इसका बड़ा कारण है कि एमपी कॉडर में कुल 296 पद हैं पर 188 ही भरे हैं। यानि 108 पद खाली हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने सीएम से इस बात के लिए नाराजगी जताई थी कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में डेढ़ साल से कोई फील्ड डायरेक्टर नहीं है, जबकि यहां तीन साल में करीब 36 बाघों की मौत हो चुकी हैं। तब रविवार को दो घंटे में ही एफडी की पोस्टिंग हो गई थी।
काम-काज पर ऐसे पड़ रहा असर
- खंडवा और रीवा सहित एक दर्जन जिलों के वर्किंग प्लान समय पर तैयार नहीं।
- सामाजिक वानिकी के अंतर्गत पौधों का समय पर रोपण नहीं।
- वन्यप्राणी पीसीसीएफ के पास वर्किंग प्लान का प्रभार है। इससे दोनों काम एक साथ नहीं हो पा रहे।
- शिकायत तथा सतर्कता शाखा में आने वाली शिकायतों के निराकरण में कमी।
सूचना पर भी कार्रवाई नहीं
टीकमगढ़ के धर्मेन्द्र त्रिपाठी कहते हैं कि जिले में डीएफओ प्रभार में है। ऐसे में फॉरेस्ट संबंधी कार्यों में गति नहीं आ रही। आलम है कि कई बार रेंजर से लेकर एसडीओ को रेत के अवैध परिवहन और जंगलों में कटाई की सूचना दी गई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
नए प्रपोजल में ऐसा सेटअप
- पीसीसीएफ पांच पद यथावत
- एपीसीसीएफ 25 से घटाकर 18 पद
- सीसीएफ 51 से कम कर 40 पद
- सीएफ 40 से कम कर 35
- डीएफओ 59 से बढ़ाकर 95 पद इसी तरह का कॉडर रिव्यू प्रस्ताव 3 साल पहले केंद्र सरकार को भेजा गया था।
कॉडर रिव्यू के लिए एक बार फिर से बना प्रस्ताव
तीन साल पहले वन विभाग ने कॉडर रिव्यू का प्रस्ताव सीएम के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। अब फिर विभाग ने कॉडर रिव्यू का प्रस्ताव शासन को भेजा है। दो दिन पहले प्रपोजल मुख्यमंत्री सचिवालय भेजा गया है। यहां से मंजूरी मिलने पर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
वन मुख्यालय में ये शाखाएं प्रभार में
एपीसीसीएफ: कुल 25 पद हैं, इनमें अनुसंधान एवं विस्तार, वन्यजीव प्रबंध आयोजना, उत्पादन, वित्त एवं बजट, वन भूमि रिकॉर्ड, कार्य आयोजना मुख्यालय, जेएफएम एवं एफडीए, सतर्कता/ शिकायत, समन्वय, निगरानी एवं मूल्यांकन, मानव संसाधन विकास, कार्य आयोजना क्षेत्रीय भोपाल, कार्य आयोजना क्षेत्रीय जबलपुर, संरक्षण मुख्यालय, वन्यजीव सुरक्षा मुख्यालय खाली हैं।
सीसीएफ: कुल पद 51, इनमें प्रशासन एक, अराजपत्रित प्रशासन दो, भू प्रबंध, समन्वय, उत्पादन, वित्त एवं बजट, भू अभिलेख, जेएफएम मनरेगा आदि।
इन जिलों-वृत्तों में भी कमी
बालाघाट, बैतूल, भोपाल, छतरपुर, रीवा, ग्वालियर, दतिया, इंदौर, झाबुआ, सागर, जबलपुर, बड़वानी, शहडोल आदि। लघु वन उपज संघ में 7 पद रिक्त हैं। वन विकास निगम में 6 अपर प्रबंध संचालक कम हैं।
इस तरह होते हैं प्रमोशन
- 14 साल में डीएफओ से सीएफ
- 18 साल में सीएफ से सीसीएफ
- 25 साल में सीसीएफ से एपीसीसीएफ
- 30 साल में एपीसीसीएफ से पीसीसीएफ बनेंगे
समस्या: प्रदेश में पदस्थ आईएफएस इन मापदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे।
आईएफएस के पदों को लेकर हर पांच साल में होता है रिव्यू
प्रदेश आईएफएस का कॉडर रिव्यू का प्रस्ताव हर 5 साल में तैयार किया जाता है, इसी के तहत आगे की कार्रवाई चल रही है। सीएम से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाता है। अधिकारी कम होने से अतिरिक्त प्रभार दिए गए हैं। -अशोक वर्णवाल,अपर मुख्य सचिव, वन