
अशोक गौतम/भोपाल। सीवेज का दूषित पानी नदी, तालाबों और अन्य जलाशयों में न पहुंचे, इसके लिए प्रदेश के 24 नगरीय निकायों में करीब 14 सौ एमएलडी(मेगा लीटर प्रतिदिन) क्षमता के 65 सीवेज वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गए हैं और रीवा, गुना, सतना सहित 28 और शहरों में 400 एमएलडी सीवेज वॉटर को ट्रीट करने 44 नए प्लांट बनाए जा रहे हैं। वर्तमान में करीब 350 एमएलडी शुद्ध पानी नगरों के पार्कों और उद्योगों को उपलब्ध भी कराया जाने लगा है। इस पानी को बेचकर कई निकाय कमाई करने लगे हैं। प्रदेश में 104 ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करने के लिए दिसम्बर 2024 तक की डेड लाइन है। खजुराहो, राजनगर, धामनोद और मैहर में प्लांट बनाने सितम्बर 2026 और सांची के प्लांट के लिए जुलाई 2027 तक का समय दिया गया है। निर्माण के तीन माह बाद इनका संचालन शुरू हो जाएगा। प्लांट निर्माण काम जिस कंपनी को दिया गया है, वहीं इसका संचालन भी करेगी। निकाय इनकी मॉनिटरिंग करेंगे। इससे सीवेज का पानी नदी, नालों और अन्य जलाशयों जाने से रोका जाएगा।
निकायों को 30 फीसदी पानी री-यूज करना जरूरी
निकाय जितना पानी शुद्ध करेंगे उसका तीस फीसदी पानी को री-यूज करना जरूरी होगा। इसके लिए निकायों को भारत सरकार के कारखाने सहित अन्य उद्योग और कारोबारियों से चर्चा कर उन्हें यह पानी खरीदने के लिए प्रेरित करना होगा। बारिश के अलावा अन्य मौसम में पानी पार्कों की सिंचाई, सड़कों और फुटपाथों की धुलाई सहित अन्य कार्यों में उपयोग करेंगे। सीवेज के पानी का निकायों ने कितना उपयोग किया है इसके लिए निकाय स्तर पर रेटिंग की जाएगी।
20 वर्ष की आबादी के हिसाब से बनाए गए प्लांट
शहरों में 20 से 25 वर्ष की आबादी के हिसाब से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए गए हैं। भोपाल, इंदौर सहित 24 निकायों में बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में से 838 एमएलडी पानी शुद्ध हो रहा है। जबकि 567 एमएलडी क्षमता के ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गए हैं, लेकिन अभी संचालन इसलिए नहीं हो रहा है क्योंकि शहरों में ज्यादा सीवेज वॉटर नहीं निकल रहा है।
प्लांट बनकर हो रहे तैयार
बड़े शहरों के ज्यादातर सीवेज ट्रीटमेंट बनकर तैयार हो गए हैं। 51 से अधिक सीवेज ट्रीटमेंट का संचालन भी शुरू हो गया है। कई निकाय इनके जरिए शुद्ध पानी का रीयूज भी करने लगे हैं। इससे नदियां भी साफ हो रही हैं। भरत यादव, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग