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विवाद के बाद दो दशक से ज्यादा समय जिद पर अड़े रहे दंपति, जीवन की सांझ में लिया समाधान का फैसला

फैमिली कोर्ट में बीते 2 साल में 12 मामले सुलझे

पल्लवी वाघेला-भोपाल। दंपति में विवाद हुआ तो फैमिली कोर्ट में भरण- पोषण, तलाक या संबंधों की बहाली के लिए केस दायर हो गए , यह केस सालों चलते रहे। यहां तक कि दंपति खुद बुजुर्गवस्था की दहलीज पर पहुंच गए। यहां हम बात कर रहे हैं, ऐसे मामलों की जहां केस दायर करने के दो दशक बीत जाने के बाद भी दंपति अपनी जिद पर अड़े रहे और केस का निराकरण नहीं हो पाया। भोपाल फैमिली कोर्ट में बीते दो साल में ऐसे ही 12 मामलों में निराकरण हुआ है, जिनमें 20 साल से ज्यादा बीत जाने पर अब जाकर दंपति केस खत्म करने को तैयार हुए। जानकारों के मुताबिक कोविड का समय बीत जाने के बाद ज्यादातर मामलों में निराकरण की पहल हुई।

दूसरी शादी से हुए बच्चे भी हो गए सेटल

केस 1 : एक केस में विवाद के 36 साल बाद पत्नी ने तलाक की हामी भर दी। दरअसल, निचली कोर्ट में एकतरफा तलाक का आदेश होने के बाद पति ने 15 दिन में ही दूसरी शादी कर ली थी। वहीं, पत्नी ने तलाक के फैसले को चुनौती देते हुए केस दायर कर दिया। इस साल जनवरी में पति ने पत्नी को समझाया कि उसकी बेटी की शादी है और वह अब इस विवाद से मुक्ति चाहता है। पत्नी ने तलाक को हामी भर दी।

एक थप्पड़ ने 26 साल लगवाए कोर्ट के चक्कर

केस 2 : 26 साल पहले पत्नी ने भरण-पोषण और पति ने तलाक का केस लगाया था। पत्नी ने बताया कि पति ने उसे सबके बीच थप्पड़ जड़ दिया था, जो वह सहन नहीं कर पाई। न तो वह पति को तलाक देगी और न ही साथ रहेगी, मामला चलता रहा। बीते साल दिसंबर में पति ने कोर्ट में सबके बीच पत्नी से माफी मांगकर कहा कि वह अब केस से थक चुका है। इसके बाद पत्नी ने बिना किसी एलुमनी के पति को तलाक दे दिया।

28 साल बाद पोते ने कराया समझौता

केस 3 : चूना भट्टी निवासी दंपति के मामले में 16 वर्षीय पोते की पहल पर 28 साल बाद दंपति समझौता कर साथ रहने लगे। पत्नी ने भरण-पोषण मांगा था और पति साथ रहना चाहते थे। पत्नी पहले मायके में रहती थी। बाद में दंपति अलग-अलग बच्चों के साथ रहते थे। पोते ने दोनों को साथ लाने का प्रयास किया और जुलाई माह में दंपति ने समझौता कर लिया।

ऐसे केसों में ज्यादातर जिद के चलते केस लंबे समय चलते हैं। कोविड के बाद यह देखने में आ रहा है कि दंपति बेवजह के विवाद को समाप्त करने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके चलते उम्रदराज कपल में भी केसेस का निराकरण जल्दी हो रहा है। – मीना गुप्ता, एडवोकेट

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