
नई दिल्ली। वोट के बदले नोट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। रिश्वत लेकर सदन में वोट दिया या सवाल पूछा तो सांसदों या विधायकों को विशेषाधिकार के तहत मुकदमे से छूट नहीं मिलेगी। सोमवार (4 मार्च, 2024) को सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने 26 साल पुराना (साल 1998) फैसला पलटते हुए कहा कि, सांसद और विधायकों को छूट नहीं दी जा सकती है। यह विशेषाधिकार के तहत नहीं आता है।
SC की 7 जजों की संविधान पीठ ने क्या कहा
CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस ए एस बोपन्ना, एम एम सुंदरेश, पी एस नरसिम्हा, जेबी पारदीवाला, संजय कुमार और मनोज मिश्रा की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया है। पीठ ने कहा कि, हम 1998 में 5 जजों की संविधान पीठ द्वारा 3:2 के बहुमत से दिए गए उस फैसले से सहमत नहीं है, जिसमें सांसदों और विधायकों को सदन में भाषण देने या वोट के लिए रिश्वत लेने के लिए मुकदमे से छूट दी गई थी।
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