
भोपाल। भोपाल से दिल्ली जाने वाली पहली वंदे भारत को लोको पायलट सुभाष पांडे और असिस्टेंट पायलट कुमार गौरव दिल्ली लेकर गए। लोको पायलट सुभाष पांडे की पूरी फैमिली उन्हें चीयर करने के लिए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पहुंची। उनकी पत्नी कृतिका पांडे भी स्टेशन पर रिश्तेदारों के साथ मौजूद थीं। peoples.update.com से बातचीत में कृतिका ने बताया कि उन्होंने अभी तक वंदे भारत में सफर नहीं किया है और उनके पति भी इस ट्रेन को पहली बार ऑपरेट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब यह सुविधा भोपाल से शुरू हुई है तो इस ट्रेन का सफर करेंगी।

ढाई घंटे पहले ड्राइवर का फोन बंद कराया
लोको पायलट के तमाम रिश्तेदार भी मध्यप्रदेश के लिए महत्वपूर्ण क्षणों के गवाह बने। वे भी स्टेशन पर पहुंचे। उन्होंने दर्शक दीर्घा से ही लोको पायलट सुभाष को हाथ देकर बुलाया तो वे भी ट्रेन से बाहर आ गए और हाथ हिलाकर अभिवादन किया। पत्नी ने बताया कि ट्रेन रवाना होने से ढाई घंटे पहले ही पति का फोन स्विच ऑफ करवा दिया गया था। उन्हें फिलहाल किसी से बात करने की भी मनाही है।
वंदे भारत एक्सप्रेस की विशेषताएं
वंदे भारत एक्सप्रेस की स्पीड 160 किमी प्रति घंटे है। ट्रैक पर इसकी रफ्तार का ट्रायल पहले ही चुका है। यह दिल्ली तक का सफर 7 घंटे 30 मिनट में पूरी करेगी। अभी भोपाल से दिल्ली का सफर 11 घंटे में पूरा होता है। यात्री 3 अप्रैल से इस ट्रेन में सफर कर सकेंगे। इसके लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है। 180 डिग्री तक रोटेट होने वाली सीटों से युक्त इस ट्रेन में अत्याधुनिक सुविधाएं हैं। सुरक्षा के लिहाज से इसमें सीसीटीवी और गार्ड व ड्राइवर से बात करने की सुविधा भी है। सूचना और मनोरंजन के लिए हर कोच में इन्फॉर्मेशन एंड इन्फोटेनमेंट सिस्टम है। इस ट्रेन में स्लाइडिंग दरवाजे हैं जो ऑटोमैटिकली खुलते और बंद होते हैं। यह देश की 11वीं सेमी हाईस्पीड ट्रेन है।
7.30 घंटे में तय करेगी दिल्ली का सफर
वंदे भारत एक्सप्रेस 52 सेकंड में 100 की स्पीड पकड़ लेती है। यह ट्रेन रानी कमलापति (आरकेएमपी) से शुरू होकर नई दिल्ली तक जाएगी। ट्रेन 694 किलोमीटर का सफर 91.35 की एवरेज स्पीड से चलकर 7.30 घंटे में तय करेगी। इसी के साथ नई दिल्ली से वंदे भारत ट्रेन 90.38 प्रति घंटा की एवरेज स्पीड से आरकेएमपी स्टेशन पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन 7.50 घंटे का समय लेगी। इस ट्रेन में 16 बोगी है, जिसमें कुल 1128 यात्री एक साथ बैठ सकते हैं। 14 एसी चेयर कार और 2 एग्जीक्यूटिव क्लास कोच है।
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ट्रेन में नहीं है चेन खींचने का सिस्टम
इस ट्रेन में अन्य ट्रेनों की तरह चेन खींचने का सिस्टम नहीं है। एक इमरजेंसी टॉक बैंक यूनिट बना है। इसमें जैसे ही पैसेंजर बटन को दबाएगा तो उसकी एलईडी ब्लिंकिंग बंद हो जाएगी और लाइट ऑटोमैटिक रेड हो जाएगी। जिससे पैसेंजर सीधे ड्राइवर से बात कर सकता है। इसके बाद ट्रेन का रेलवे स्टॉफ चाबी से अलार्म को न्यूट्रल करेगा।
सभी कोच में CCTV कैमरा लगाए
ट्रेन में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी कोच में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। ट्रेन के पूरी तरह से रुकने पर ही ट्रेन के ऑटोमैटिक दरवाजे खुलेंगे। ऐसे ही ट्रेन के सभी दरवाजे बंद हो जाने के बाद ही ट्रेन चलना शुरू करेगी। हर कोच में एक टीवी स्क्रीन भी लगाई गई है। कोच में इंटरनेट के लिए ऑनबोर्ड वाई-फाई की सुविधा दी गई है। ट्रेन पूरी तरह से साउंडप्रूफ रहेगी।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधा
हाई स्पीड ट्रेन में भोजन की भी सुविधा मिलेगी। इस ट्रेन में जीपीएस आधारित उन्नत यात्री सूचना प्रणाली भी है जो आपको आने वाले स्टेशनों और सूचनाओं के बारे में अपडेट करेगी। ट्रेन में स्वच्छता की समस्या को हल करने के लिए जैव वैक्यूम शौचालय बनाया गया है। कोच में दिव्यांगों के लिए अनुकूल स्थान उपलब्ध कराया गया है। ट्रेन के कोच में डिब्बों में व्हीलचेयर पार्क करने के लिए स्थान होंगे, ताकि दिव्यांग को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
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इमरजेंसी में ऐसे खोले सकेंगे दरवाजे
- आपातकालीन स्थिति में कांच तोड़ने के लिए प्रत्येक कोचे में हथौड़े दिए गए हैं।
- ट्रेन के पूरी तरह ठहरने तक प्रतीक्षा करें।
- फिर लाल पैनल के कांच को तोड़ें और लाल हैंडल को तीर के निशान की ओर घुमाएं।
- दरवाजे में दिए हैंडल स्लाट का उपयोग करके दरवाजे को एक ओर खिसकाएं।
- यह तय करें कि बगल के ट्रैक पर कोई ट्रेन नहीं आ रही है।