उत्तराखंड: नवरात्रि में मां भगवती के मंदिर में भीषण आग, लकड़ी का पूरा ढांचा जलकर खाक

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में नवरात्रि के दौरान मां भगवती के मंदिर में भीषण आग लग गई। इस घटना में मंदिर के लकड़ी से बने मुख्य ढांचे और उसकी खूबसूरत नक्काशी को भारी नुकसान पहुंचा है। आग की लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोग दुखी हैं। यह मंदिर बदियाकोट गांव में स्थित है। लकड़ी पर की गई पारंपरिक नक्काशी के कारण मंदिर की अलग पहचान थी। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट या पूजा के दौरान जलाए गए दीपक से आग लगने की जताई जा रही है।
नवरात्रि के छठे दिन लगी आग
यह घटना नवरात्रि के छठे दिन सुबह की बताई जा रही है। मंदिर बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित है। मंदिर लकड़ी से बना हुआ था, इसलिए आग तेजी से फैल गई। देखते ही देखते लपटों ने मंदिर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित होने के कारण आग बुझाने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में भी परेशानी होने की बात सामने आई है। इससे मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा।
मंदिर का पंडाल और लकड़ी की नक्काशी भी जली
आग में मंदिर परिसर में बनाया गया पूजा पंडाल भी जलकर खाक हो गया। मंदिर की लकड़ी पर की गई बारीक और पारंपरिक नक्काशी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि पूजा के लिए जलाए गए दीपक की लौ या लंबी बाती के संपर्क में आने से आग लगी होगी। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। नवरात्रि के दौरान हुई इस घटना से स्थानीय लोगों में दुख का माहौल है। मंदिर की पारंपरिक बनावट और धार्मिक महत्व के कारण यह अग्निकांड लोगों के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।
मां भगवती मंदिर की क्या है मान्यता?
बदियाकोट का मां भगवती मंदिर दानपुर घाटी में स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर मां भगवती ने दैत्य निशुम्भ का वध किया था। इसी वजह से इस जगह का नाम पहले वधकोट पड़ा, जो बाद में बदियाकोट कहलाने लगा। यह मंदिर कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में सल्पाती मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु शामिल होते हैं।
आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं
मंदिर में आग लगने के कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शॉर्ट सर्किट और दीपक से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, इस घटना में मंदिर के मुख्य ढांचे, पारंपरिक काष्ठकला और पूजा पंडाल को हुए नुकसान की खबर है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मंदिर को दोबारा उसके पारंपरिक स्वरूप में तैयार करने के प्रयास किए जाएंगे।




















