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तेलंगाना टनल हादसा : तीसरे दिन भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन, 8 कर्मचारी अब भी फंसे, बचाव कार्य में आर्मी, NDRF और SDRF की टीमें जुटीं

तेलंगाना। तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) टनल का एक हिस्सा 22 फरवरी की सुबह 8:30 बजे ढह गया। इस हादसे में टनल के अंदर काम कर रहे 60 कर्मचारियों में से 52 किसी तरह बचकर बाहर निकल आए, लेकिन 8 कर्मचारी अब भी सुरंग में फंसे हुए हैं। इनमें 2 इंजीनियर, 2 मशीन ऑपरेटर और 4 मजदूर शामिल हैं।

तीसरे दिन भी जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन

रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। राहत और बचाव कार्य में आर्मी, NDRF, SDRF और राज्य सरकार की अन्य एजेंसियां लगी हुई हैं। उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल हादसे में फंसे लोगों को बचाने वाली विशेषज्ञ टीम को भी इस अभियान में शामिल किया गया है।

फंसे हुए मजदूर दूसरे राज्यों के

फंसे हुए 8 मजदूरों में से 4 झारखंड, 2 उत्तर प्रदेश और 1-1 पंजाब व जम्मू-कश्मीर से हैं। रेस्क्यू टीमें लगातार उनके संपर्क में आने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

रेस्क्यू में आ रही मुश्किलें

राज्य के मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने बताया कि हादसा सुरंग के मुहाने से करीब 13 किमी अंदर हुआ है। रेस्क्यू टीम फंसे हुए लोगों से महज 100 मीटर की दूरी पर है, लेकिन पानी और कीचड़ के कारण ऑपरेशन में बाधा आ रही है। कीचड़ घुटनों तक जमा हो गया है, जिससे राहत कार्य धीमा पड़ रहा है। SDRF अधिकारियों के मुताबिक, टनल के अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं बचा है, लेकिन सुरंग में ऑक्सीजन भेजी जा रही है और पानी निकालने के लिए 100 हॉर्सपावर का पंप मंगवाया गया है।

एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरों की मदद से किया जा रहा

सर्वेक्षण बचाव कार्य को तेज करने के लिए टनल में एंडोस्कोपिक और रोबोटिक कैमरे लगाए गए हैं। L&T के एंडोस्कोपिक ऑपरेटर दोवदीप ने बताया कि इन कैमरों की मदद से टनल के अंदर की स्थिति को समझने की कोशिश की जा रही है। इसी तकनीक का उपयोग उत्तराखंड के सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन में भी किया गया था।

डॉग स्क्वाड की मदद ली जा रही बचाव कार्य में NDRF डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है। सुरंग में अंदर आवाजें लगाई गईं, लेकिन अब तक कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला है।

बचाव कार्य में लगी टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF के 145 और SDRF के 120 जवान तैनात हैं। इसके अलावा, सिकंदराबाद में स्थित भारतीय सेना की एक इंजीनियर रेजिमेंट को भी इस ऑपरेशन में शामिल किया गया है।

क्या हुआ था हादसे के दिन

22 फरवरी को सुबह करीब 8:30 बजे टनल के एंट्री पॉइंट से 13 किमी अंदर सुरंग की छत का करीब 3 मीटर हिस्सा ढह गया। इस दौरान वहां मौजूद 60 कर्मचारियों में से 52 किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन टनल बोरिंग मशीन (TBM) चला रहे 8 कर्मचारी अंदर ही फंस गए।

बचाव कार्य की चुनौतियाँ

जिलाधिकारी बी संतोष ने बताया कि रेस्क्यू टीमें सुरंग में वहां तक पहुंच गई हैं, जहां टनल बोरिंग मशीन (TBM) काम कर रही थी। हालांकि, अंदर फंसे कर्मचारियों से कोई संपर्क नहीं हो सका है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग के अंदर कीचड़ भरा हुआ है, जिससे आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है।

बचाव टीमों ने टनल में ऑक्सीजन पहुंचाने का प्रबंध किया है, ताकि अंदर फंसे लोगों को सांस लेने में दिक्कत न हो। इसके अलावा, सुरंग से पानी निकालने के लिए 100 हॉर्सपावर की क्षमता वाले पंप मंगवाए गए हैं।

पूरी कोशिश कर रही राज्य सरकार

तेलंगाना सरकार की ओर से इस पूरे मामले की निगरानी की जा रही है। मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव ने कहा कि मजदूरों के बचने की संभावना कम है, लेकिन फिर भी हमारी पूरी कोशिश जारी है कि सभी को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

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