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पश्चिम बंगाल उपचुनाव रिजल्ट: तीनों सीटों पर वोटों की गिनती जारी, भवानीपुर से ममता बनर्जी 34 हजार वोटों से आगे

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 3 सीटों पर 30 सितंबर को हुए उपचुनाव के लिए आज सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इनमें भवानीपुर हाई प्रोफाइल सीट है, जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल और सीपीएम के श्रीजीव विश्वास से है। भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव का रिजल्ट सीएम ममता बनर्जी के लिए काफी अहम है। आज के रिजल्ट से स्पष्ट हो जाएगा कि ममता राज्य की सीएम बनी रहेंगी या नहीं। भवानीपुर के अलावा बंगाल के समसेरगंज और जंगीपुर में हुए उपचुनाव के परिणाम भी आज आएंगे। सबसे पहले पोस्टल बैलेट के गिनती हो रही है इसके बाद ईवीएम में पड़ी वोटों की गिनती शुरू होगी।

11वें राउंड की काउंटिंग

भवानीपुर सीट पर अब सीएम ममता बनर्जी की जीत लगभग तय मानी जा रही है। 11वें राउंड की काउंटिंग के बाद वह भाजपा नेता प्रियंका टिबरेवाल से 34 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रही हैं।

9 बजे तक की गिनती

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट से सीएम ममता बनर्जी 2800 वोटों से आगे चल रही हैं। इसके अलावा टीएमसी समसेरगंज और जांगीपुर सीट पर भी फिलहाल लीड कर रही है।

21 राउंड की मतगणना होगी

भवानीपुर सीट पर वोटों की गिनती शुरू हो गई है। इस सीट पर कुल 21 राउंड की मतगणना होगी।

अगर ममता उपचुनाव हार जाती हैं तो…

भवानीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में अगर सीएम ममता बनर्जी चुनाव हार जाती हैं तो उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना होगा। टीएमसी को सत्ता में बने रहने के लिए विधायक दल का नया नेता चुनना होगा। अगर टीएमसी किसी और को विधायक दल का नेता नहीं चुनती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है।

नंदीग्राम में मिली थी ममता को हार

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच 8 चरणों में विधानसभा चुनाव हुए थे। टीएमसी से बीजेपी में आए सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हरा दिया था। चुनाव के परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। ममता बनर्जी ने अधिकारी के चुनाव को तीन आधारों पर शून्य घोषित करने की मांग की है- भ्रष्ट आचरण, धर्म के आधार पर वोट मांगना और बूथ पर कब्जा करना। उन्होंने दोबारा मतगणना की उनकी याचिका को खारिज करने के चुनाव आयोग के फैसले पर भी सवाल उठाया है।

भवानीपुर में गुजराती आबादी का बहुमत

भवानीपुर में 70% से अधिक गैर-बंगाली हैं और यहां गुजराती आबादी का बहुमत है, जो ममता को अपने प्रतिनिधि के स्वीकार नहीं करते हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं होगा जब कोई मौजूदा सीएम चुनाव हार गया हो और पार्टी ने सरकार बनाई है।

राज्य में नहीं है विधान परिषद

राज्य में विधान परिषद होता तो वो विधान परिषद के सदस्य के रूप में ममता को चुना जा सकता है। जैसे कि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे और यूपी के सीएम आदित्यनाथ भी शपथ लेने के वक्त किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में दोनों विधान परिषद के सदस्य बने। लेकिन पश्चिम बंगाल में विधान परिषद नहीं है जिसकी वजह से ममता की राह कठिन है। इसलिए उनके लिए भवानीपुर उपचुनाव जीतना ज्यादा जरूरी है।

पहले राज्य में थी विधान परिषद

5 जून 1952 को पश्चिम बंगाल में 51 सदस्यों वाली विधान परिषद का गठन हुआ था। लेकिन बाद में 21 मार्च 1969 को इसे खत्म कर दिया गया। ऐसे में ममता को सीएम बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर किसी सीट से विधानसभा चुनाव जीतना अनिवार्य है। ममता बनर्जी के लिए टीएमसी पार्टी के विजयी उम्मीदवार शोभंदेब चट्टोपाध्याय ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया था ताकि सीएम ममता 30 सितंबर को चुनाव लड़ सकें। यह सीट 21 मई से खाली है।

क्या इतिहास दोहराएंगी ममता बनर्जी?

1970 में यूपी के पूर्व सीएम त्रिभुवन नारायण सिंह उपचुनाव हार गए थे और बाद में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद 2009 में झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन भी उपचुनाव में हार गए थे। सोरेन की हार के परिणामस्वरूप राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ममता त्रिभुवन नारायण सिंह या शिबू सोरेन की तरह इतिहास दोहराएंगी, जो सीएम रहते हुए उपचुनाव चुनाव हार गए थे।

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