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पंजाब के किसानों का चंडीगढ़ में धरना : पुलिस ने सील किए बॉर्डर, MSP गारंटी समेत 13 मांगों को लेकर कर रहे प्रोटेस्ट

चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 5 मार्च से चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मोहाली से चंडीगढ़ में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, चंडीगढ़ प्रशासन ने अभी तक धरने की अनुमति नहीं दी है, जिसके चलते पुलिस ने पंजाब से सटे सभी बॉर्डर सील कर दिए हैं। हाईवे पर लंबा जाम लग गया है और पुलिस बाइक और कार सवारों के आईडी प्रूफ भी चेक कर रही है।

किसानों की मुख्य मांगें

किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से कुल 13 मांगों को लेकर यह प्रदर्शन किया है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं-

MSP की कानूनी गारंटी: किसानों की सबसे बड़ी मांग फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देने की है ताकि उन्हें उचित दाम मिल सके।

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए: किसानों का कहना है कि सरकार को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक लागत से डेढ़ गुना ज्यादा दाम देने की नीति लागू करनी चाहिए।

किसान कर्ज माफ किया जाए: छोटे और मध्यम किसानों के सभी तरह के कर्जों को माफ किया जाए, ताकि वे आत्महत्या करने को मजबूर न हों।

कृषि उपकरणों पर सब्सिडी: किसानों के कृषि उपकरणों को जीएसटी से बाहर रखा जाए और डीजल पर सब्सिडी दी जाए।

बिजली बिल में राहत: पंजाब में बढ़े हुए बिजली बिल वापस लिए जाएं और ट्यूबवेल कनेक्शनों पर सब्सिडी जारी रखी जाए।

पराली जलाने पर दंड न लगे: किसानों पर पराली जलाने के नाम पर लगाए गए जुर्माने और केस वापस लिए जाएं।

गन्ना किसानों को समय पर भुगतान: गन्ना किसानों को बकाया राशि का जल्द भुगतान किया जाए और उचित मूल्य तय किया जाए।

कृषि कानूनों के विरोध में दर्ज मामले वापस हों: 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे वापस लिए जाएं।

पंजाब के बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा: पिछले साल आई बाढ़ से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

पंजाब सरकार से जुड़ी मांगें: पंजाब सरकार से किसानों को वादे पूरे करने की मांग की गई है, जिसमें गेंहू-धान के खरीद से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।

CM भगवंत मान और किसानों के बीच मीटिंग में बहस

किसानों ने पहले पंजाब सरकार के साथ बातचीत करने की कोशिश की थी। 4 मार्च को मुख्यमंत्री भगवंत मान और किसान नेताओं की मीटिंग हुई, लेकिन यह विवादों में घिर गई। किसानों ने अपनी मांगें रखीं, लेकिन जब मुख्यमंत्री ने पूछा कि उनका धरना 5 मार्च को जारी रहेगा या नहीं, तो किसानों ने हां में जवाब दिया। इसके बाद सीएम मीटिंग छोड़कर चले गए।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बाद में मीडिया से कहा- “मैं किसानों का दोस्त हूं, लेकिन मीटिंग और धरना एक साथ नहीं हो सकता। अगर उनकी मांगें मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं, तो मेरे साथ बैठक करने का क्या फायदा?”

पुलिस ने किसान नेताओं को हिरासत में लिया

मीटिंग के एक दिन बाद 4 मार्च की सुबह पंजाब पुलिस ने कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया या फिर नजरबंद कर दिया। इनमें बलबीर सिंह राजेवाल समेत कई किसान नेता शामिल थे। किसानों को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, लेकिन किसानों ने चंडीगढ़ में धरना देने के फैसले को वापस लेने से इनकार कर दिया।

चंडीगढ़ बॉर्डर सील, हाई अलर्ट पर पुलिस

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने पंजाब से सटे सभी बॉर्डर सील कर दिए हैं। यहां तक कि बाइक और कार सवारों के भी पहचान पत्र चेक किए जा रहे हैं। खरड़-चंडीगढ़ हाईवे पर लंबा जाम लग गया है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।

किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां की अपील

भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) के प्रमुख जोगिंदर सिंह उगराहां ने किसानों से अपील की है कि, अगर पुलिस उन्हें रोकती है, तो वे सड़क के किनारे खाली जगह पर बैठ जाएं और किसी भी हाल में हिंसा या रोड जाम न करें। उन्होंने कहा कि, पुलिस किसानों को बदनाम करने के लिए जानबूझकर साजिश रच रही है।

किसानों का आंदोलन तेज होने के आसार

संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि, जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जातीं, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। यह आंदोलन आगे और तेज हो सकता है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार किसानों के इस धरने को कैसे संभालती है।

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