
भोपाल। गैस त्रासदी की आज 40वीं बरसी है। आज से 40 साल पहले 2-3 दिसंबर 1984 की वो काली रात थी, जो भोपाल में ऐसी तबाही लेकर आई थी, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड परिसर से आज ही के दिन मिथाइल आइसोसायनेट नामक जहरीली गैस के रिसाव से सैकड़ों लोग कालकवलित हो गए थे।
वहीं, एक दिन पहले सोमवार को गैस पीड़ितों से जुड़े संगठनों ने मशाल रैली और श्रद्धांजलि सभा की। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के सामने बने स्मारक पर गैस पीड़ित इकट्ठा हुए और मृतकों को श्रद्धांजलि भी दी। सीएम डॉ. मोहन यादव ने भोपाल गैस त्रासदी के दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी है।
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राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि
राज्यपाल मंगूभाई पटेल भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर मंगलवार को सेंट्रल लाइब्रेरी में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। राज्यपाल ने कार्यक्रम में भोपाल गैस त्रासदी के दिवंगतजनों की स्मृति में श्रद्धांजलि दी। वहीं कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग, विजय शाह , राज्य मंत्री कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी और महापौर मालती राय भी श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुई। दिवंगतों की स्मृति में 2 मिनिट का मौन रख श्रद्धांजलि दी गई। इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास, संचालक गैस राहत और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
सीएम ने गैस त्रासदी पीड़ितों के दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर त्रासदी का शिकार बने दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम ने एक्स पर पोस्ट किया,‘‘भोपाल गैस त्रासदी की बरसी पर उन दिवंगत आत्माओं को सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनके जीवन का असमय अंत इस त्रासदी में हुआ। जहरीली गैस के प्रभावित नागरिकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें।”

पूर्व संध्या पर निकाला मशाल जुलूस, जलाई कैंडल
इधर, भोपाल गैस त्रासदी की बरसी की पूर्व संध्या पर सोमवार शाम गैस पीड़ितों से जुड़े संगठनों ने मशाल रैली और सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के सामने बने स्मारक पर गैस पीड़ित जमा हुए वहां कैंडल जलाई। इस दौरान वे लोग भी मौजूद थे, जिन्होंने गैस त्रासदी में अपनों को खोया और खुद भी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस दौरान डाऊ कैमिकल का पुतला जलाकर गुस्सा भी जाहिर किया। गैस पीड़ितों से जुड़ी 7 से अधिक संस्थाओं ने अलग-अलग कार्यक्रम किए।

बीएमएचआरसी में सोमवार शाम भोपाल गैस त्रासदी के दिवंगतों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर विश्वास सारंग, महापौर मालती राय एवं बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव समेत अस्पताल के कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने गैस त्रासदी के दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी एवं दो मिनट का मौन रखा। मंत्री सारंग एवं महापौर ने अस्पताल भर्ती मरीजों को हेल्थ किट बांटी। यूनियन कार्बाइड हादसे के 40 साल भी गैस पीड़ितों का दर्द कम नहीं हुआ है। गैस पीड़ितों में सांस, कैंसर, किडनी और मधुमेह के मरीज पांच गुना बढ़ गए हैं।
आज स्थानीय अवकाश
जिले के लिए राज्य शासन द्वारा घोषित स्थानीय अवकाश के तहत भोपाल गैस त्रासदी स्मृति दिवस मंगलवार, 3 दिसंबर को स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है।
भोपाल गैस कांड कैसे हुआ था?
घटना भोपाल के यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के प्लांट नंबर सी में हुई थी। जब फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस लीक हो गई थी। 2 दिसंबर की रात 8:30 बजे से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की हवा जहरीली हो रही थी। सर्द रातों में ठंडी हवा तेज होने के साथ ही वो जहरीली गैस शहर के कई हिस्सों में पहुंच गई। कुछ लोग सो रहे थे। कुछ सोने की तैयारी में थे। 3 तारीख लगते ही ये हवा जहरीली के साथ ही जानलेवा भी हो गई। सरकार के एफिडेविट के मुताबिक, घटना के कुछ ही घंटों के भीतर जहरीली गैस से करीब 3000 लोगों की मौत हो गई। वहीं यूनियन कार्बाइड का नाम बाद में डॉव केमिकल्स हो गया।
कितने लोगों की जान गई?
इसमें कितनों की जान गई? कितने अपंग हो गए? इस बात का कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दुर्घटना में 3,787 लोग मारे गए थे। 2006 में पेश किए गए एक एफिडेविट में सरकार ने कहा कि भोपाल गैस कांड में 5,58,125 लोग घायल हुए, जिसमें लगभग 3900 गंभीर रूप और स्थायी रूप से विकलांग लोग शामिल हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट में पेश किए गए एक आंकड़े में बताया गया है कि दुर्घटना ने 15,724 लोगों की जान ले ली थी।
कितनी गैस लीक हुई थी?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से करीब 40 टन मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस लीक हुई थी। ये एक जहरीली गैस होती है। शरीर के अंदर जाते ही कुछ ही मिनट में इंसान की मौत हो जाती है।
गैस लीक की वजह?
फैक्ट्री के प्लांट नंबर सी से गैस के लीक होने की सूचना मिली थी। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, मिथाइल आइसोसाइनेट प्लांट को ठंडा करने के लिए पानी में मिला दिया गया था। इससे गैसों की मात्रा बढ़ गई और टैंक संख्या 610 पर ज्यादा दबाव पड़ा। गैस टैंक से बाहर निकलने लगी। मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के लीक होने से करीब 5 लाख लोग प्रभावित हुए।
गैस लीक के बाद क्या हुआ?
उस समय जब गैस धीरे-धीरे लोगों को घरों में घुसने लगी, तो लोग घबराकर बाहर आए। किसी की आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था, तो किसी का सिर चकरा रहा था और सांस की तकलीफ तो सभी को थी। 3 दिसंबर की सुबह अचानक हजारों की संख्या में लोग हॉस्पिटल की तरफ भाग रहे थे। उस वक्त शहर में दो सरकारी हॉस्पिटल थे। लोग परेशान थे। किसी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, तो कोई हांफते-हांफते ही मर गया। जानकारी के मुताबिक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का अलार्म सिस्टम भी खराब था। गैस रिसाव के बाद कोई अलार्म नहीं बजा।
डॉक्टरों के लिए चुनौती
भोपाल के डॉक्टरों ने कभी भी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था। लोगों में चक्कर आना, सांस फूलना, स्किन में जलन और चकत्ते की शिकायत थी। कई लोग तो अंधे हो गए। डॉक्टर मिथाइल आइसोसाइनेट के लक्षण का पता नहीं लगा पा रहे थे। दोनों हॉस्पिटल ने कथित तौर पर भोपाल गैस लीक के पहले दो दिनों में लगभग 50,000 रोगियों का इलाज किया। गैस लीक होने के 8 घंटे बाद भोपाल को जहरीली गैस के असर से मुक्त मान लिया गया था, लेकिन 1984 में हुई इस दुर्घटना से मिले जख्म 37 साल बाद भी भरे नहीं हैं।
कौन था मुख्य आरोपी?
इस हादसे का मुख्य आरोपी वॉरेन एंडरसन था, जो इस कंपनी का CEO था। 6 दिसंबर 1984 को एंडरसन को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन अगले ही दिन 7 दिसंबर को उन्हें सरकारी विमान से दिल्ली भेजा गया और वहां से वो अमेरिका चले गए। इसके बाद एंडरसन कभी भारत लौटकर नहीं आए। कोर्ट ने उन्हें फरार घोषित कर दिया था। 29 सितंबर 2014 को फ्लोरिडा के वीरो बीच पर 93 साल की उम्र में एंडरसन का निधन हो गया।
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