
नई दिल्ली। अपने बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि, वह पक्षपात करेंगे और ‘मिया’ मुसलमानों को राज्य पर “कब्ज़ा” नहीं करने देंगे। सीएम ने नागांव में 14 साल की लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना को लेकर राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करने के लिए विपक्षी दलों के कार्य स्थगन प्रस्ताव पर यह बात कही।
असम को ‘मियां भूमि’ नहीं बनने दूंगा : CM
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि, कांग्रेस को जितना चिल्लाना और चीखना है वो कर ले, लेकिन मैं असम को ‘मियां भूमि’ नहीं बनने दूंगा। अगर जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित रखा जाता तो अपराध की दर नहीं बढ़ती।
विपक्ष के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री पर पक्षपात का आरोप लगाया तो उन्होंने कहा- मैं पक्षपात करुंगा, आप क्या कर सकते हैं? विपक्ष के हंगामे पर सरमा ने जोर देकर कहा कि, ‘लोअर असम के लोग अपर असम क्यों जाएंगे? ताकि मिया मुस्लिम असम पर कब्जा कर लें? हम ऐसा नहीं होने देंगे’ तीखी नोकझोंक के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य आसन के समीप आ गए।
विपक्ष ने चार स्थगन प्रस्ताव पेश किए थे
सरमा ने यह बयान विधानसभा में विपक्षी दलों द्वारा नागांव में 14 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की पृष्ठभूमि में राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करने के लिए लाए गए स्थगन प्रस्तावों पर दिया।
कांग्रेस, एआईयूडीएफ और सीपीआई (एम) के विधायकों और एकमात्र निर्दलीय विधायक अखिल गोगोई ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों सहित राज्य में बढ़ते अपराधों से पैदा हुए हालात पर चर्चा के लिए चार स्थगन प्रस्ताव पेश किए थे।
कौन होते हैं मियां मुसलमान
- मियां एक मुस्लिम समुदाय है जो पूर्वी पाकिस्तान से आकर असम में बसे थे। पूर्वी पाकिस्तान अब अलग होकर बांग्लादेश बन चुका है।
- मियां मुस्लिम बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों से आकर बसे थे और ये बंगाली भाषा बोलते हैं।
- असम के स्थाई लोग इन्हें मियां कहकर पुकारा करते थे। बोंगल के नाम से भी इन्हें पुकारा जाता था।
- कई शोधकर्ताओं का मानना है कि, भारत की आजादी से पहले असम के प्रधानमंत्री सैयद मुहम्मद सादुल्लाह के समय अंग्रेजों के कहने पर इन्हें बुलवाया गया था।
- उन्होंने इन लोगों को कृषि खाद उत्पादन से जुड़े कामों के लिए बुलाया था।
- साल 1971 में बांग्लादेश-पाकिस्तान के युद्ध के समय भी मियां मुसलमान बड़ी संख्या में असम आकर बस गए थे।
- असम की 126 विधानसभा सीटों में से 30 क्षेत्रों में मियां समुदाय के मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा है।
- असम कैबिनेट ने कुछ समय पहले ही राज्य की स्वदेशी मुस्लिम आबादी के सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण को मंजूरी दी है। साल 2022 में पांच मुस्लिम वर्गों की पहचान करके उन्हें स्वदेशी असमिया मुसलमानों के रूप में मान्यता दी गई थी। ये सभी असमिया भाषा बोलने वाले लोग हैं।
- दूसरा एक और समुदाय है, जिसे असम में मियां मुसलमान कहा गया है और ये लोग बांग्ला भाषी हैं।
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