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CEC की नियुक्ति पर SC के केंद्र से कड़े सवाल, कहा- किसी PM पर आरोप लगने पर एक्शन लिया ?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए एक उदाहरण के साथ सरकार से पूछा कि कभी किसी प्रधानमंत्री (Prime Minister) पर आरोप लगे तो क्या आयोग ने उनके खिलाफ एक्शन लिया है ?

‘आयुक्त को स्वतंत्र, निष्पक्ष होना चाहिए’

जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि मैं यहां काल्पनिक तौर पर सिर्फ उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री की बात कह रहा हूं। आयुक्त को स्वतंत्र, निष्पक्ष होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि उनका चयन सिर्फ कैबिनेट के बजाए उससे कहीं ज्यादा बड़ी बॉडी की ओर से हो। राजनीतिक नेता बातें तो करते रहे हैं पर जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हुआ। जस्टिस केएम जोसफ ने कहा कि अगर कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो क्या यह सिस्टम के पूरी तरह से बिखरने का मामला नहीं होगा ?

SC की टिप्पणी पर सरकार का जवाब

इस पर सरकार ने जवाब दिया कि सिर्फ काल्पनिक स्थिति के आधार पर केंद्रीय कैबिनेट पर अविश्वास नहीं किया जाना चाहिए। अब भी योग्य लोगों का ही चयन किया जा रहा है।

सिस्टम में अगर खामी हो तो उसमें बदलाव जरूरी

जस्टिस जोसफ के बाद जस्टिस अजय रस्तोगी ने भी निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आपने इसकी न्यायपालिका से तुलना की है। न्यायपालिका में भी नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव आए। मौजूदा सिस्टम में अगर खामी हो तो उसमें सुधार और बदलाव जरूरी है। सरकार जो जज और सीजेआई की नियुक्ति करती थी तब भी महान न्यायाधीश बने, लेकिन प्रक्रिया पर सवालिया निशान थे।

सरकार यस मैन को नियुक्त करती है : SC

जस्टिस जोसेफ ने कहा कि कोई भी सरकार एक यस मैन को नियुक्त करती है और उसके जैसी सोच होती है। आप उसे सुरक्षा का आश्वासन देते हैं, देखने में तो सब ठीक है। लेकिन, जो क्वालिटी की कमी है उसका क्या ? उसके कार्यों की स्वतंत्रता है या नहीं ? पद के साथ कुछ स्वतंत्रता जुड़ी हुई है। यह वह गुण है जिसकी आवश्यकता है। दरअसल, केंद्र सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कोलेजियम जैसी व्यवस्था कायम करने की मांग वाली याचिका का विरोध किया है।

यह कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है : सरकार

इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा हां, बिल्कुल यह एक आवश्यकता है। लेकिन, यह एक विचार प्रक्रिया है। 1991 के बाद मुझे कोई ट्रिगर पॉइंट नहीं मिल रहा है कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि 2017 में सुनील अरोड़ा की नियुक्ति को देखिए। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जिस व्यक्ति को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है, उसे वरिष्ठता के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नामित किया जा सकता है।

‘बेस्ट को ही किया जाए नियुक्त’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और दो इलेक्शन कमिश्नरों (ECs) के कंधों पर महत्वपूर्ण शक्तियां दी हैं। इसलिए इनकी नियुक्ति के वक्त निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाना चाहिए ताकि बेस्ट व्यक्ति ही इस पद पर नियुक्त किया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस बारे में संविधानिक चुप्पी का फायदा उठाया जा रहा। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 324 (2) में CEC/ECs की नियुक्ति के लिए कानून बनाने की बात कही गई।

2018 में दायर हुई थी याचिका

यह सुनवाई कोर्ट ने भविष्य में कॉलेजियम सिस्टम के तहत चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और चुनाव आयोग (EC) की नियुक्ति की प्रक्रिया पर 23 अक्टूबर 2018 को दायर की गई एक याचिका पर की है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र एक तरफा चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति करती है। पांच जजों (जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषीकेश रॉय और सीटी रविकुमार) की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

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