
पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। प्रदेश का आईएफएस अधिकारियों का कॉडर मैनेजमेंट गड़बड़ा गया है। 5 साल पहले प्रमोशन पाने की होड़ में वरिष्ठ स्तर के पदों की संख्या बढ़ाने की मंजूरी ली जाती रही, लेकिन केंद्र सरकार से उस अनुपात में आईएफएस अफसर प्रदेश को नहीं मिले । लिहाजा समय पर पदोन्नति नहीं होने से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ), मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) और वन संरक्षक के पद लगातार खाली हैं।
अब सरकार ने सामाजिक वानिकी में मुख्य वन संरक्षक के पदों पर डीएफओ पदस्थ किए हैं। कई अफसरों को 200-200 किमी के वन मंडल प्रभार में दिए गए हैं। विभाग के लिए सबसे बड़ी समस्या अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पदों की है। कॉडर में 25 में से 8 पदभरे हैं। वित्त/बजट, वन भूमि रिकॉर्ड, आदि शाखाएं इस समय डबल प्रभार में हैं।
इसलिए खाली पड़ें हैं पद
- एपीसीसीएफ बनने के लिए 25 साल की सेवाएं पूरी करना होता है, लेकिन इस पद में हर साल तीन- चार ही प्रमोशन पाते हैं, ऊपर से इतने ही रिटायर हो जाते हैं।
- मुख्य वन संरक्षक के लिए सेवाकाल 20 साल है। वन संरक्षक के लिए 14 साल की सेवा अवधि पूरा करना जरूरी है। इन पदों में भी हर साल 2-4 रिटायर होते हैं तो इतने ही प्रमोट। जिससे पदों की रिक्तता बनी रहती है।
जितने रिटायर होते हैं उतने प्रमोशन, हिसाब बराबर
वरिष्ठ स्तर पर औसतन हर दो माह में अधिकारी सेवानिवृत हो रहे हैं। इसके चलते एक अफसर के पास तीन-तीन शाखाओं का प्रभार है। एचयू खान के पास कैंपा के साथ दूसरे विभाग भी हैं।
असर
- कई फाइलें पेंडिंग, गश्त भी प्रभावित ।
- पद खाली होने से समय पर मॉनिटरिंग नहीं हो पाती है।
- कर्मचारियों से संबंधित फाइलें महीनों पड़ी रहती हैं।
- वन क्षेत्र में अमला कम होने से लकड़ी चोर सक्रिय रहते हैं।
अब मिलने लगे ज्यादा IFS
पीसीसीएफ प्रशासन एक और वन बल प्रमुख से संपर्क नहीं हो सका लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि 1997 से 2006-07 तक प्रदेश को दो-तीन आईएफएस मिलते थे, लेकिन वर्ष 2022 मेें 15 और 2023 कैडर में 17 अफसर मिले हैं।
वरिष्ठ क्रम में ये है स्थिति
- एपीसीसीएफ के 25 में 13 पर रिक्त पड़े हैं
- मुख्य वन संरक्षक के 51 में 31 पद वर्तमान में खाली
- सीएफ के 40 पदों में 20 ही भरे हैं
सेवाकाल पूरा नहीं कर पाने से अफसरों की कमी है
हमारे पास जितने वर्षों की सेवा चाहिए उसके लिए पर्याप्त अधिकारी नहीं हैं। इसलिए पद खाली हैं। यह समस्या कई साल तक बनी रहेगी। मैदानी स्तर पर अधिकारी कम होने से कुछ हद तक काम तो प्रभावित होता है। -असीम श्रीवास्तव, वन बल प्रमुख मप्र