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अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश : इंदौर क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आरोपी, हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी

इंदौर में हर्बल प्रोडक्ट का कॉल सेंटर चलाता था आरोपी

हेमंत नागले, इंदौर। इंदौर क्राइम ब्रांच द्वारा एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया गया है जो कि इंदौर में रहकर देश के अलग-अलग राज्यों में हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर कई लोगों से ठगी करता था और उसके बाद अपनी कंपनी का नाम बदलकर अन्य कंपनी खोल लेता था। इंदौर क्राइम ब्रांच को भागलपुर व राजस्थान से शिकायत के बाद जब आरोपी के बारे में क्राइम ब्रांच ने जानकारी जुटाई तो इंदौर के कॉल सेंटर पर छापा मारा। जहां पर 7 से 8 लड़कियां देश के अन्य जिलों में फोन कर इस हर्बल प्रोडक्ट के फ्रेंचाइजी के नाम पर धोखाधड़ी कर रही थी। वहीं, मुख्य सरगना के पकड़े जाने के बाद अब पुलिस को इस गिरोह के अन्य साथियों की तलाश है।

क्या है मामला ?

डीसीपी निमिष अग्रवाल ने बताया कि इंदौर क्राइम ब्रांच को भागलपुर जिले के फरियादी और राजस्थान जिले के एक फरियादी द्वारा यह शिकायत दर्ज कराई गई कि इंदौर स्थित एक कॉल सेंटर से कॉल कर हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी के नाम पर उनके साथ लाखों रुपए की ठगी की गई है। पुलिस ने जब इंदौर के फ्लैट पर छापामार कार्रवाई की तो वहां पर कई युवतियां हर्बल प्रोडक्ट की कॉलिंग करते हुए दिखाई दी। जहां, मुख्य सरगना गणेश को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया। मुख्य सरगना गणेश ने क्राइम ब्रांच को बताया कि उसने स्वास्तिक हर्बल, श्री आरोग्य संस्था व सहयोग आरोग्य संस्था के नाम से अलग-अलग फर्जी कंपनियां बनाई, जो कि सिर्फ कागजों में थी इसका कोई अस्तित्व नहीं था।

गणेश इतना शातिर था कि वह जिस कंपनी के नाम से लोगों से ठगी करता था, कुछ दिनों में उस कंपनी का नाम वह वेबसाइट से हटा देता और धोखाधड़ी करने के बाद अन्य फर्जी कंपनियां खोलने लगता। क्राइम ब्रांच को सैकड़ों की संख्या में ऐसी कंपनियां मिलने की उम्मीद है, जिसमें आरोपी ने अब तक मध्य प्रदेश सहित भारत के कई राज्यों में कई लोगों से ठगी की है। वहीं, पुलिस द्वारा अब अन्य जानकारी जुटाई जा रही है।

फर्जी बैंक खाते और सिम का करता था उपयोग

आरोपी गणेश ने बताया कि वह अपनी फर्जी कंपनियां खोलने के लिए ऐसे व्यक्तियों की तलाश करता था जो बेरोजगार हो और उनके नाम से एक बैंक खाता और उन्हीं के नाम से कुछ सिम मंगवाता था। जिस व्यक्ति का बैंक खाता होता था उसे वह हर महीने 5 हजार रुपए प्रति खाता देता था और जब कंपनी बंद हो जाती थी तो संबंधित व्यक्ति को रुपए नहीं देता था। बेरोजगार व्यक्ति अपने नाम से सिम लौटाकर गणेश को दे दिया करते थे और अपना बैंक खाता भी गणेश को दे देते थे। जब गणेश अपनी ठगी का रुपया इन बैंक हाथों में मंगवा लेता था और पकड़े जाने के डर से कुछ समय बाद उसे बंद कर देता था।

2 साल से चला रहा था इंदौर में हर्बल कॉल सेंटर

क्राइम ब्रांच ने बताया कि लगभग 2 वर्षों से आरोपी इंदौर के अलग-अलग जगहों पर फ्लैट किराए से लेकर इस फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से प्रदेश के कई जिलों में कॉल कर हर्बल प्रोडक्ट की फ्रेंचाइजी देने के नाम पर ठगी करता था। जब भी पुलिस को आरोपी के खिलाफ शिकायत मिलती वह अपना ऑफिस का एड्रेस भी बदल देता था।

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