नई दिल्ली। आज के समय में सभी को हर भाषा का ज्ञान हो, यह संभव नहीं है। लेकिन, अनुवाद के जरिए हम किसी भी देश की भाषा को सरलता से समझ और जान सकते हैं। आज विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस (International Translation Day) मनाया जा रहा है। हर साल 30 सितम्बर को इंटरनेशनल ट्रांसलेशन डे मनाया जाता है। विश्व अनुवाद दिवस बाइबल के अनुवादक सेंट जीरोम की स्मृति में मनाया जाता है।
इंटरनेशनल ट्रांसलेशन डे का इतिहास
30 सितम्बर को सेंट जीरोम बाइबल की पूण्य तिथि पर हर साल विश्व अनुवाद दिवस मनाया जाता है। जिन्हें अनुवादकों का संरक्षण संत माना जाता है। दुनिया भर में अनुवादकों को एक जुट करने के लिए इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ट्रांसलेटर्स (FIT) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस की शुरुआत वर्ष 1991 में की गई। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ ट्रांसलेटर्स (FIT) की स्थापना 1953 में की गई थी। र्ष 1991 में एफआईटी ने पूरे विश्व में अनुवाद कम्युनिटी की पहचान को बढ़ावा देने व उनके सम्मान के लिए अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस मनाने की शुरुआत की।
इस दिन का महत्व
24 मई 2017 को, संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने 30 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस के रूप में घोषित करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद दिवस का महत्व एक दूसरे से जुड़ने वाले राष्ट्रों में पेशेवर अनुवाद की भूमिका को पहचानना और उसकी सराहना करना है। यह दिन दुनिया भर में अनुवाद समुदाय के लिए एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है। यह विभिन्न देशों में अनुवाद के पेशे को बढ़ावा देने की एक कोशिश है।
इस साल की थीम
हर साल विश्व अनुवाद दिवस के अवसर पर एक थीम जारी की जाती है। जिससे लोगों को इसके प्रति जागरूकता बढ़े। इस साल की थीम “अनुवाद और स्वदेशी भाषाएं( Translation And indigenous Language )” है।