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हरियाणा के पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान का निधन : 83 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, लंबे समय से लिवर कैंसर से थे पीड़ित

चरखी दादरी। हरियाणा के पूर्व सहकारिता मंत्री और दो बार विधायक रहे सतपाल सांगवान का निधन हो गया है। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे, जहां सुबह करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे उनका पार्थिव शरीर चरखी दादरी के लोहारू रोड स्थित उनके निवास स्थान पर पहुंचा।

लंबे समय से बीमार थे सांगवान

पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान लिवर कैंसर से पीड़ित थे। स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा था और उम्र अधिक होने के कारण उनका शरीर इलाज का जवाब नहीं दे रहा था। इलाज के दौरान वर्तमान विधायक और उनके बेटे सुनील सांगवान लगातार अस्पताल में उनकी देखभाल में जुटे रहे। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार

उनके पार्थिव शरीर को सोमवार सुबह 8:30 बजे चरखी दादरी के लोहारू रोड स्थित निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। यहां बड़ी संख्या में समर्थकों और गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार दोपहर 2 बजे उनके पैतृक गांव चंदेनी में किया जाएगा।

सीएम ने जाना था हाल

निधन से कुछ घंटे पहले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मेदांता अस्पताल पहुंचे थे और पूर्व मंत्री के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। इस दौरान कैबिनेट मंत्री राव नरवीर सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष कमल यादव भी उनके साथ थे।

सतपाल सांगवान के निधन पर राज्य के कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया और उन्हें एक जनसेवी और कर्मठ नेता बताया।

बेटी के निधन के बाद से थे दुखी

सतपाल सांगवान अपनी बेटी उषा कादयान के निधन के बाद से ही मानसिक रूप से टूट चुके थे। 60 वर्षीय बेटी उषा कादयान के असामयिक निधन से वे बेहद दुखी थे, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ा। इस सदमे से वे उबर नहीं सके और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई।

सतपाल सांगवान का राजनीतिक सफर

सतपाल सांगवान हरियाणा की राजनीति में एक अहम नाम रहे हैं। उन्होंने चरखी दादरी विधानसभा से 6 बार चुनाव लड़ा, जिनमें से वे दो बार विधायक बने।

  • 1996 में वे हरियाणा विकास पार्टी (HVP) से विधायक बने।
  • 2009 में उन्होंने हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के टिकट पर चुनाव जीता और विधायक बने।
  • हजकां के कांग्रेस में विलय के बाद वे भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार में सहकारिता मंत्री बने।
  • उन्होंने कांग्रेस और जननायक जनता पार्टी (JJP) से भी चुनाव लड़ा।
  • पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल उन्हें “बुलडोजर” कहकर बुलाते थे, क्योंकि वे अपने फैसले दृढ़ता से लेने के लिए जाने जाते थे।

2024 में भाजपा में हुए शामिल

  • अप्रैल 2024 में सतपाल सांगवान ने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया।
  • 19 अप्रैल 2024 को सोनीपत में आयोजित एक समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
  • इस दौरान खट्टर ने कहा था कि सांगवान अपने क्षेत्र के प्रति समर्पित नेता हैं।

बेटे को राजनीति में उतारा

  • भाजपा में शामिल होने के बाद सतपाल सांगवान ने अपनी राजनीतिक विरासत बेटे को सौंपी।
  • उनके बेटे सुनील सांगवान ने गुरुग्राम के भौंडसी जेल अधीक्षक के पद से VRS लेकर भाजपा जॉइन की।
  • 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर दादरी से जीतकर सुनील सांगवान विधायक बने।

क्षेत्र में लोकप्रिय नेता

  • सतपाल सांगवान अपने क्षेत्र में बेहद लोकप्रिय थे और उन्हें जनसेवा के लिए जाना जाता था।
  • उन्होंने दादरी और आसपास के इलाकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण काम किए।
  • खासकर किसानों और सहकारी संस्थाओं के हित में कई अहम फैसले लिए।
  • राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर
  • उनके निधन से हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
  • उनके समर्थक उन्हें एक मजबूत और जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद कर रहे हैं।
  • क्षेत्र की जनता का मानना है कि उनका जाना दादरी के लिए एक बड़ी क्षति है।

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