सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, गवाह के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं, 7 साल की बच्ची की गवाही से आरोपी पिता को उम्रकैद
Publish Date: 26 Feb 2025, 6:21 PM (IST)Reading Time: 2 Minute Read
नई दिल्ली। कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की गवाही पर हत्यारे पति को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची ने अपने पिता को मां की हत्या करते देखा था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गवाह की कोई उम्र सीमा नहीं होती है। अगर कोई बच्चा गवाह देने में सक्षम है तो छोटी उम्र के बच्चे भी ऐसे मामले में गवाही दे सकते हैं। दरअसल, यह मामला मध्य प्रदेश के सिंघराई गांव का है। जिसमें आरोपी व्यक्ति ने अपनी 7 साल की बेटी के सामने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी।
मध्यप्रदेश कोर्ट ने खारिज की बच्ची की गवाही
मामला नजरों में तब आया, जब मृतक के रिश्तेदार भूरा सिंह उर्फ यशपाल ने चीख-पुकार सुनने और बाद में जल्दबाजी में अंतिम संस्कार किए जाने का पता चलने पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसी बच्ची की गवाही पर उसके पिता के खिलाफ केस दर्ज किया और मामला हाईकोर्ट तक चला गया। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बच्ची की गवाही मानने से इनकार कर दिया और आरोपी को बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मान्य की बच्चों की गवाही
जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट गया तो, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाही में उम्र की सीमा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि बच्चों के बयानों को आसानी से बदला जा सकता है, ऐसे में पुलिस को सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। साथ ही उन्होंने साफ किया कि बच्चा अगर गवाही देने और पहचान करने में सक्षम है, तो वो गवाह की तरह ही गवाही दे सकते हैं और ये मान्य भी होगी। बच्चे की गवाही को ऐसे खारिज कर देना ठीक नहीं है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
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