
जीपी बिड़ला संग्रहालय में भोपाल वासी 1 जून तक भोपाल विलीनीकरण दिवस को लेकर रोचक प्रदर्शनी देख सकते हैं कि किस तरह अमर शहीदों के बलिदान की वजह से भोपाल का विलीनीकरण भारत में हो सका अन्यथा यह एक अलग पाकिस्तान होता। इस तरह के कथनों के साथ यह प्रदर्शनी कई लेखों व दस्तावेजों के साथ प्रदर्शित की गई है। प्रदर्शनी में भोपाल विलीनीकरण आंदोलन के बंदियों की क्षेत्रवार सूची यहां लगाई गई है। इसी सूची के आधार पर शासन द्वारा आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों की सूची बनाई गई थी। इसमें बरेली, औबेदुल्लागंज, उदयपुरा, सिलवानी, रायसेन आदि क्षेत्रों के आंदोलनकारियों के नाम पढ़े जा सकते हैं। इसे विलय बंदी सूची नाम दिया गया है। साथ ही लिखा है, इन्होंने निरकुंश भोपाल के गढ़ को ढाया। इसके अलावा उस दौर में हुए बोरास आंदोलन को लेकर भी दस्तावेज हैं।
सामंती चट्टानें टूटीं, बहने लगी विलय की गंगा
नई राह समाचार-पत्र के विलीनीकरण विशेषांक के कवर पेज पर बोरास घाट पर नवाबी शासन ने आंदोलन को दबाने का पूरा प्रयास किया। आंदोलनकारियों पर लाठिया-गोलियां चलवाई गईं। फिर राष्ट्रकवि पंडित माखनलाल चतुर्वेदी ने लिखा, उस दिन जब बोरास घाट पर रंगा रक्त से राष्ट्र तिरंगा, सामंती चट्टानें टूटी, बहने लगी विलय की गंगा। इस पूरी कविता को प्रदर्शनी में पढ़ा जा सकता है।
पाकिस्तान का हिस्सा बनना चाहते थे नवाब
इस बारे में भोपाल स्वातंत्र्य आंदोलन स्मारक समिति के संस्थापक सचिव डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार पटेल अगर उस समय सख्त रुख नहीं अपनाते तो आज भारत के बीच में कई पाकिस्तान होते। 1947 में उस समय कुछ रियासतों पर राज करने वाले नवाब और राजा पाकिस्तान का हिस्सा बनना चाहते थे।
पुरानी तस्वीरों में देखें भोपाली की कहानी
यहां कुछ पुरानी तस्वीरे भी हैं जिसमें नवाब भोपाल हमीदुल्ला खान हवाई अड्डे पर स्वतंत्र भारत से न मिलने की घोषणा करते देखे जा सकते हैं। वहीं एक तस्वीर में दिखता है कि भोपाल विलीनीकरण के दिन 1 जून 1949 की सुबह पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया।