महिलाओं ने ह्यूमन रंगोली से उकेरी मुखी की तस्वीर, सीएम मोहन यादव ने की सराहना

श्योपुर। सेवा संकल्प अभियान के तहत ढेगदा स्थित क्रीड़ा परिसर में यह आयोजन किया गया। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग और एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं के साथ कन्या आदिवासी परिसर की छात्राओं ने हिस्सा लिया। चीते के मुख के रंगों से मेल खाते परिधान पहनकर प्रतिभागियों ने विशाल आकृति तैयार की। इस आयोजन के जरिए महिला शक्ति, एकजुटता और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया।
ह्यूमन रंगोली से बनाई चीता मुखी की विशाल प्रतिकृति
श्योपुर जिले के ढेगदा स्थित क्रीड़ा परिसर में शुक्रवार को क्रिएटिव श्योपुर के तहत ह्यूमन रंगोली के माध्यम से भारतीय मादा चीता मुखी की भव्य प्रतिकृति बनाई गई। इस आयोजन में एक हजार से अधिक महिलाओं और छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने चीते के चेहरे के रंगों से मेल खाते परिधान पहनकर विशाल आकृति तैयार की, जिसने आयोजन को खास बना दिया।
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सीएम मोहन यादव ने नारी शक्ति की पहल को सराहा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने पर श्योपुर में आयोजित इस कार्यक्रम को अद्भुत और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत नारी शक्ति की यह अनूठी पहल वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और जनभागीदारी का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने लोगों से प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील भी की।
सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ आयोजन
मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी महिलाओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कन्या आदिवासी परिसर की छात्राओं की भागीदारी ने भी आयोजन को खास बनाया। शारदीय नवरात्र के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में महिला शक्ति, एकजुटता और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया।
17 सितंबर 2022 को शुरू हुआ था प्रोजेक्ट चीता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत की थी। इसके बाद से कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ मध्य प्रदेश की पहचान चीता स्टेट के रूप में भी मजबूत हुई है। परियोजना के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
भारत में जन्मी पहली चीता पीढ़ी की खास पहचान है मुखी
भारतीय मादा चीता मुखी का जन्म 29 मार्च 2023 को कूनो नेशनल पार्क में हुआ था। वह नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला की संतान है और करीब 70 साल बाद भारत की धरती पर जन्मी पहली चीता पीढ़ी की खास पहचान मानी जाती है। नवंबर 2025 में मुखी ने पांच शावकों को जन्म दिया था, जिसे भारत की चीता पुनर्स्थापन परियोजना की बड़ी उपलब्धि माना गया। वर्तमान में मुखी तीन साल की हो चुकी है।




















