सीहोर: कोसमी में आदिवासी आंदोलन का विस्फोट, प्रशासन बेनतीजा; 15 हजार लोगों के साथ भोपाल कूच का ऐलान

सीहोर। वनभूमि से बेदखली की कार्रवाई के विरोध में कोसमी में भड़का आदिवासी आंदोलन अब जिला प्रशासन की सीमाओं से निकलकर राजधानी भोपाल तक पहुंचने की तैयारी में है। पांच दिन से जारी धरना, वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बातचीत और समझाइश के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। नाराज प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार सुबह 8 बजे 10 से 15 हजार लोगों के साथ पैदल भोपाल कूच कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने अपनी मांगें रखने का ऐलान किया है। आंदोलनकारियों के इस फैसले ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
पांच दिन से धरना, फिर भी समाधान का इंतजार
भैरूंदा तहसील के ग्राम कोसमी में वनभूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवार विरोध में धरने पर बैठे हैं। बुधवार को आंदोलन का पांचवां दिन रहा, लेकिन अब तक ऐसा कोई निर्णय सामने नहीं आया, जिससे प्रदर्शनकारियों की नाराजगी दूर हो सके। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें अपनी मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया जारी रहने के बीच वे तत्काल समाधान चाहते हैं। इसी गतिरोध के बाद आंदोलनकारियों ने भोपाल तक पैदल मार्च का रास्ता चुना है।
कमिश्नर-कलेक्टर और एसपी पहुंचे, नहीं मानी बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के और एसपी सोनाक्षी सक्सेना सहित प्रशासनिक अधिकारी बुधवार को कोसमी पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से चर्चा की और धरना समाप्त कराने का प्रयास किया। उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलेगा, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद आंदोलन का जारी रहना प्रशासन के प्रयासों के लिए बड़ा सवाल बन गया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
'बात करनी है तो धरना स्थल पर आइए'
बातचीत के दौरान उस समय स्थिति पेचीदा हो गई, जब प्रभावित परिवारों ने ग्राम पंचायत पहुंचकर चर्चा करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जिन्हें बात करनी है, वे धरना स्थल पर आएं; वे अपनी जगह छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। इसके बाद एसडीएम और थाना प्रभारी ने काफी देर तक समझाइश दी। उनके प्रयासों के बाद धरना स्थल से दो लोग ग्राम पंचायत पहुंचे और वहां मौजूद कमिश्नर तथा कलेक्टर के सामने अपना पक्ष रखा। हालांकि इस चर्चा के बाद भी ऐसा कोई ठोस रास्ता नहीं निकल सका, जिससे धरना समाप्त हो पाता।
जांच के बाद शासन स्तर पर होगा फैसला
संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि वे शासन की ओर से मामले की जांच करने पहुंचे हैं। प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है और संबंधित परिवारों सहित अन्य लोगों से चर्चा कर जानकारी जुटाई गई है। सभी पक्षों के तथ्यों की पड़ताल के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि वनभूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि प्रभावित परिवारों के मूल गांवों में रहने के लिए अन्य स्थान उपलब्ध हैं या उनकी आजीविका और आवास इसी जमीन पर निर्भर हैं। जांच में सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
वन विकास निगम ने भी उठाए सुरक्षा के सवाल
इस बीच वनग्राम कोसमी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद शासकीय डिपो परिसर में जारी धरना-प्रदर्शन को लेकर वन विकास निगम ने आपत्ति जताई है। निगम के परियोजना परिक्षेत्राधिकारी ने पुलिस को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और परिसर खाली कराने की मांग की है। पत्र के अनुसार, 11 अक्टूबर को कोसमी के कक्ष क्रमांक आरएफ-426 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद कुछ लोगों ने नीलामी हॉल के सामने प्रदर्शन शुरू कर दिया था।
ज्वलनशील सामग्री का हवाला, पुलिस से हस्तक्षेप की मांग
निगम ने प्रदर्शन को बिना अनुमति आयोजित बताते हुए शासकीय संपत्ति की सुरक्षा पर चिंता जताई है। पत्र में डिपो परिसर में महत्वपूर्ण सामग्री और ज्वलनशील संसाधन होने का उल्लेख करते हुए किसी अप्रिय घटना की आशंका व्यक्त की गई है। पुलिस से नियमानुसार कार्रवाई कर परिसर खाली कराने और भविष्य में सुरक्षा बनाए रखने के लिए सहयोग मांगा गया है। दूसरी ओर, प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
अब भोपाल कूच पर टिकी निगाहें
प्रशासनिक बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद अब आंदोलन की अगली दिशा भोपाल कूच से तय होगी। प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार सुबह 8 बजे 10 से 15 हजार लोगों के साथ पैदल मार्च निकालकर मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखने की घोषणा की है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक ओर कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर प्रभावित परिवारों की मांगों और उनके पुनर्वास से जुड़े सवालों का समाधान तलाशने की जरूरत है। अब देखना होगा कि राजधानी कूच की घोषणा के बाद शासन स्तर पर क्या पहल होती है और कोसमी में पांच दिन से जारी गतिरोध टूट पाता है या नहीं।




















