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मेरठ ड्रम कांड: मुस्कान-साहिल को फांसी, जुर्माना भी ठोका; कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। करीब 13 महीने की सुनवाई में 127 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों की गवाही दर्ज हुई। जानिए नीले ड्रम केस, अदालत के फैसले और पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया से जुड़ी पूरी खबर।
मेरठ ड्रम कांड: मुस्कान-साहिल को फांसी, जुर्माना भी ठोका; कोर्ट में क्या-क्या हुआ?

उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। करीब 13 महीने तक चली सुनवाई में 127 तारीखें पड़ीं और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। फैसले के दौरान सौरभ की मां और भाई अदालत में मौजूद रहे। इस मामले में शव को नीले ड्रम में छिपाने की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा था।

13 महीने की सुनवाई, 127 तारीखों के बाद फैसला

मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान 22 से अधिक गवाहों की गवाही दर्ज की गई। फैसले के समय दोनों दोषियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई, जबकि सौरभ के परिवार के सदस्य अदालत में मौजूद थे।

अदालत ने लगाया जुर्माना

पीड़ित परिवार के वकील कृष्ण कुमार दुबे और विजय बहादुर ने फैसले के बाद बताया कि अदालत ने मौत की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया है। उनके मुताबिक, संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत 50 हजार रुपये और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वकीलों ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत ने महाभारत का उल्लेख करते हुए अपराध के अनुरूप सजा देने की बात कही। अभियोजन पक्ष ने मामले में पेश किए गए सबूतों को फैसले का अहम आधार बताया।

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क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव के तीन टुकड़े किए गए और उन्हें छिपाने के लिए नीले ड्रम में रखा गया था। शव को इस तरह छिपाने की घटना सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में रहा। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अपने तर्क रखे, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाया। सजा सुनाए जाने से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान साहिल चुप रहा, जबकि मुस्कान ने अपने बच्चों का हवाला देते हुए राहत की गुहार लगाई।

फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने जताई संतुष्टि

फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया। अदालत परिसर में ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए गए। सौरभ के परिवार की ओर से शुरुआत से ही दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की जा रही थी। वकील के मुताबिक, दोषी महिला की बच्ची को लेकर भी कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। हालांकि, बच्ची की देखभाल और उससे जुड़े नियमों की स्थिति संबंधित कानून और परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। इस फैसले के साथ मेरठ का चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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