
नई दिल्ली। आज, 2 मार्च 2025 से रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह महीना खास महत्व रखता है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमजान साल का नौवां महीना होता है, जिसे इबादत, रोजा और अल्लाह की रहमत प्राप्त करने के लिए जाना जाता है। इस महीने के दौरान मुस्लिम समाज के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं और अल्लाह से मगफिरत (माफी) की दुआ मांगते हैं।
PM मोदी ने दी रमजान की बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रमजान महीने की शुरुआत के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा- ‘रमजान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है, यह हमारे समाज में शांति और सद्भाव लेकर आए। यह पवित्र महीना चिंतन, कृतज्ञता और भक्ति का प्रतीक है। साथ ही हमें करुणा, दया और सेवा के मूल्यों की याद दिलाता है।’
कैसे तय होती है रमजान की शुरुआत?
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, रमजान का महीना चांद देखने के बाद शुरू होता है। सऊदी अरब में चांद नजर आने के अगले दिन भारत में पहला रोजा रखा जाता है। इस बार 28 फरवरी को चांद नजर नहीं आया, इसलिए भारत में रमजान का पहला दिन 2 मार्च को तय किया गया।
रोजा रखने के नियम
रमजान के महीने में रोजा रखने के कुछ खास नियम होते हैं:
सहरी: रोजेदार सूर्योदय से पहले भोजन करते हैं, जिसे सहरी कहा जाता है।
इफ्तार: सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है, इसे इफ्तार कहते हैं।
नमाज: रमजान के दौरान पांचों वक्त की नमाज पढ़ना जरूरी होता है, साथ ही रात में तरावीह की नमाज भी अदा की जाती है।
संयम और दान: रोजे का मकसद सिर्फ भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि आत्मसंयम और जरूरतमंदों की मदद करना भी होता है।
रमजान के तीन चरण (अशरा)
रमजान के 30 दिनों को तीन हिस्सों (अशरा) में बांटा गया है:
पहला अशरा (रहमत के 10 दिन): इन दिनों में अल्लाह की रहमत मांगी जाती है।
दूसरा अशरा (माफी के 10 दिन): इन दिनों में अपने गुनाहों की माफी के लिए दुआ की जाती है।
तीसरा अशरा (निजात के 10 दिन): आखिरी 10 दिनों में जहन्नम से निजात पाने की इबादत की जाती है।
रमजान के महत्व का धार्मिक कारण
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, साल 610 ईस्वी में इसी महीने में पैगंबर मोहम्मद को कुरान शरीफ का ज्ञान प्राप्त हुआ था। तभी से रमजान को पवित्र माना जाता है और मुस्लिम समुदाय के लोग इसे विशेष इबादत और आत्मसंयम के साथ मनाते हैं।
रोजा रखकर मुसलमान अल्लाह के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण दिखाते हैं। इस महीने में किए गए अच्छे कर्मों और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए मुसलमान इस दौरान ज्यादा से ज्यादा इबादत करने और नेकी के काम करने का प्रयास करते हैं। रोजा रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग रोजे की हालत में भूखे और प्यासों की तड़प को समझ सकें।
ईद-उल-फितर का पर्व
रमजान के अंत में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। यह दिन अल्लाह का शुक्रिया अदा करने और भाईचारे को बढ़ावा देने का प्रतीक माना जाता है। इस दिन गरीबों को जकात (दान) देने की भी परंपरा है, ताकि समाज के हर तबके के लोग ईद की खुशी मना सकें। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है। इस साल रमजान के बाद ईद-उल-फितर 30 या 31 मार्च 2025 को मनाई जा सकती है।
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