संगीतकार देवा को अंतिम विदाई देते समय भावुक हुए रजनीकांत, CM विजय ने परिवार को दी सांत्वना

चेन्नई। तमिल सिनेमा के दिग्गज संगीतकार और गायक देवानासन चोक्कलिंगम उर्फ देवा का 17 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 साल के थे। रविवार को उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे सुपरस्टार रजनीकांत भावुक नजर आए। वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने देवा के परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनके अंतिम संस्कार के लिए राजकीय सम्मान की घोषणा भी की। देवा को तमिल फिल्म इंडस्ट्री में 'थेनिसाई थेंद्रल' के नाम से जाना जाता था। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने दक्षिण भारतीय भाषाओं की 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत तैयार किया। उन्होंने चेन्नई की लोकप्रिय संगीत शैली 'गाना' को मुख्यधारा के सिनेमा में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
रजनीकांत की फिल्मों के संगीत से मिली खास पहचान
देवा और सुपरस्टार रजनीकांत ने कई फिल्मों में साथ काम किया। इनमें 'अन्नामलाई' (1992), 'बाशा' (1995) और 'अरुणाचलम' (1997) जैसी फिल्में शामिल हैं। देवा ने रजनीकांत की फिल्मों के टाइटल कार्ड और एंट्री के दौरान बजने वाले संगीत को भी खास पहचान दिलाई। रजनीकांत की फिल्मों में उनकी तैयार की गई धुनें दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुईं। दोनों की पेशेवर साझेदारी ने तमिल सिनेमा को कई यादगार संगीत के पल दिए। देवा के निधन के बाद रजनीकांत उनके घर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वह भावुक नजर आए।
CM विजय ने परिवार को दी सांत्वना
देवा के निधन से तमिल फिल्म इंडस्ट्री में शोक का माहौल है। मुख्यमंत्री विजय ने भी संगीतकार के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके अंतिम संस्कार के लिए राजकीय सम्मान की घोषणा की गई। देवा के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। कलाकारों और संगीतकारों ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
1986 में तमिल फिल्म से शुरू किया था करियर
देवा का जन्म 20 नवंबर 1950 को हुआ था। तमिल सिनेमा में पहचान बनाने से पहले ही उन्होंने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। उन्होंने धनराज मास्टर से पियानो सीखा था। धनराज मास्टर ने संगीतकार इलैयाराजा को भी संगीत सिखाया था। इसके अलावा, देवा ने जे.बी. कृष्णा से हारमोनियम पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली। उनके भाई सापेश और मुरली संगीत निर्देशकों के साथ वाद्ययंत्र वादक के रूप में काम करते थे। उन्होंने देवा को फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ने में मदद की। देवा ने साल 1986 में तमिल फिल्म 'मट्टुकारा मन्नारू' से संगीतकार के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद 'मनसुकेथा महारासा' और 'वैगासी पोरन्थाचू' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। उनका काम तमिल सिनेमा से आगे बढ़कर तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों तक पहुंचा।
चेन्नई की 'गाना' संगीत शैली को दिलाई पहचान
देवा की सबसे बड़ी खासियत लोक संगीत की धुनों को लोकप्रिय फिल्मी संगीत में ढालना थी। उन्होंने चेन्नई की गलियों में लोकप्रिय 'गाना' संगीत शैली को तमिल फिल्मों में जगह दिलाने में अहम योगदान दिया। उनके संगीत में लोक धुनों, मधुर संगीत और दमदार बीट्स का मेल देखने को मिलता था। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत तैयार किया। उनकी धुनों ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई और कई गाने आज भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हैं।
कार्थी और सैम सीएस ने जताया दुख
देवा के निधन पर अभिनेता कार्थी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनकी तस्वीर साझा कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि देवा की ऊर्जा और बच्चों जैसी मासूमियत उनके संगीत जितनी ही खास थी। उन्होंने अपने काम में हमेशा एक अलग खुशी भरी। कार्थी ने कहा कि उनकी धुनें और चेन्नई का जीवंत संगीत हमेशा लोगों के जीवन का हिस्सा बने रहेंगे। उन्होंने देवा के परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदनाएं भी व्यक्त कीं।
संगीतकार सैम सीएस ने भी देवा को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनकी सदाबहार धुनों और यादगार गानों को याद करते हुए कहा कि देवा ने अपने असाधारण हुनर से तमिल संगीत को समृद्ध किया।
कई बड़े पुरस्कारों से सम्मानित हुए देवा
देवा को अपने संगीत करियर के दौरान कई सम्मान मिले। इनमें तमिलनाडु सरकार का 'कलैमामणि' पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के लिए तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार शामिल हैं। कन्नड़ सिनेमा में उनके योगदान को भी सराहा गया। फिल्म 'अमृता वर्षिणी' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। देवा अपने पीछे चार दशक से ज्यादा के संगीत सफर की विरासत छोड़ गए हैं। रजनीकांत की फिल्मों से लेकर चेन्नई की पारंपरिक 'गाना' शैली तक, उनका योगदान दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत में लंबे समय तक याद किया जाएगा।




















