
राजीव कटारे-ग्वालियर। शहर के वकील को कोर्ट में एक केस से ऐसी प्रेरणा मिली कि उसने कुछ सालों में 750 बंधुआ मजदूरों को गुलामी से मुक्ति दिलाई। एडवोकेट अमीन खान ने बताया कि वह अपने पेशे के साथ-साथ वर्ष 2016 से यह कार्य कर रहे हैं। इस दौरान वह बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत करीब 250 लोगों को प्रशासन से सर्टिफिकेट भी दिला चुके हैं। वह केवल ग्वालियर में ही नहीं, बल्कि उप्र, महाराष्ट्र, नागपुर और राजस्थान भी जा चुके हैं।
महाराष्ट्र के लातूर जिले से 2 साल पहले ग्वालियर के नया गांव के 26 लोगों को मुक्त कराया था। इसके साथ ही ईटमा गांव से ईंट के भट्टे पर काम कर रहे एक साथ 51 लोगों को उनकी टीम ने वर्ष 2019 में मुक्त कराया था। 10 दिन पहले ही गुना के रहने वाले 13 बंधुआ मजदूरों को राजस्थान के किशनगंज के वादीपुरा कस्बे से मुक्त कराया है।
समाजसेवी महिला से मिली इस कार्य की प्रेरणा
खान ने बताया कि उन्हें इस कार्य की प्रेरणा एक समाजसेवी महिला से मिली। वकालत के दौरान एक महिला समाजसेवी कोर्ट में महिलाओं के अधिकार को लेकर पीआईएल लगाने इंदौर से आई थीं। इसके बाद इनके मन में ख्याल आया कि उन्हें भी जरूरतमंदों के लिए काम करना चाहिए। वह समाजसेवी संस्थाओं के कार्यक्रम में जाने लगे, इसी बीच एक मीटिंग में आदिवासी बच्चों पर हो रहे अत्याचार की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने का काम शुरू कर दिया।