
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर छतरपुर में संशोधित केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन करेंगे। सीएम डॉ. मोहन यादव राज्य सरकार के एक साल पूरा होने पर संवाददाताओं से चर्चा कर रहे थे। इस दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ ही उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला भी उपस्थित रहे।
बुंदेलखंड की बदल जाएगी तस्वीर : सीएम
चर्चा के दौरान सीएम डॉ. यादव ने बताया कि स्वर्गीय वाजपेयी ने कहा था कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होना चाहिए। उन्होंने ही नदी जोड़ो परियोजना की परिकल्पना की थी। प्रधानमंत्री मोदी से इस संबंध में संवाद के बाद राज्य सरकार ने केन बेतवा लिंक परियोजना की उलझनों को समझा। किन्हीं कारणों से इसकी लागत बढ़ गई है। विभागों के तालमेल की वजह से इस परियोजना में रुकावटें आ रहीं थीं, लेकिन अब 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी इसका भूमिपूजन करने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से बुंदेलखंड की तस्वीर बदल जाएगी। इससे 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। राज्य के छतरपुर, निवाड़ी, सागर, विदिशा, दमोह, पन्ना, टीकमगढ़, दतिया और रायसेन को इसका लाभ मिलेगा। इससे सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा भी मिलेगी।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल का मामला भी उलझा था
सीएम ने कहा कि इसी तरह पार्वती-कालीसिंध-चंबल का मामला भी उलझा था। राजस्थान में विरोधी सरकार भी इस परियोजना को अटका रही थी। इस योजना से उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश के श्योपुर से आगर तक शिवपुरी, गुना, श्योपुर, देवास उज्जैन, आगर, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर, मुरैना की स्थिति बदलने वाली है। इसके लिए राजस्थान से कई बैठकें हुईं और पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के सामने जयपुर में हुई बैठक में सहमति बनी।
MP में जलराशि की कमी नहीं है
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में उपलब्ध जलराशि की कमी नहीं है, पर अपनी नदियों की राशि का सही उपयोग हो तो राज्य आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य सरकार अब प्रदेश के अंदर की नदियों को जोड़ने का भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इंदौर की कान्ह नदी का प्रदूषित जल क्षिप्रा में मिलता था, इसलिए उसे उज्जैन से कुछ दूर पहले डक्ट के माध्यम से शिफ्ट कर दिया है। 1980 के बाद से सिंहस्थ में क्षिप्रा से स्नान नहीं हो पाया है। ये स्नान गंभीर और नर्मदा से कराया गया। इस बार योजनाबद्ध तरीके से काम किया गया है। अशुद्ध पानी को अलग किया और क्षिप्रा के लिए वर्षा जल को संग्रहित किया। अब न केवल सिंहस्थ में बल्कि पूरे साल क्षिप्रा का पानी मिलेगा।
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