
हर्षित चौरसिया-जबलपुर। जबलपुर में मटर की फसल पर तेजी से रस्ट (गेरुआ) रोग ने अटैक करना शुरू कर दिया है। पाटन, शहपुरा, कटंगी सहित अन्य ब्लॉक में करीब 40 हजार हेक्टेयर में मटर की फसल होती है। पाटन क्षेत्र में फसल में इस रोग का असर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। तुड़ाई के लिए बची करीब 10 फीसदी मटर को बचाने के लिए कृषक अपने स्तर पर कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर इसके उपचार में जुटे हुए हैं। कृषि विभाग के अफसरों का कहना है कि इस मामले में अभी कोई जानकारी उनके पास नहीं आई है। 4 हजार हेक्टेयर में मटर की तुड़ाई बाकी है। गौरतलब है कि 2024 में भी फरवरी में मटर पर गेरुआ रोग का असर हुआ था। इस रस्ट रोग ने 60-70 के दशक में गेहूं, मसूर की फसल पर भी अटैक किया था। जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर में मटर की फसल होती है।
क्या है गेरुआ रोग
कृषि वैज्ञानिक डॉ. ब्रजेश अरजरिया ने बताया गेरुआ (रस्ट) रोग फफूंद जनित रोग है और तेजी से फसलों को अपनी चपेट में लेता है। ठंड के साथ बारिश होना इस रोग के लिए बहुत अनुकूल होता है। इस रोग से पीड़ित पौधे की पत्तियां पहले पीली पड़ती हैं और इसके बाद गेरुआ रंग की हो जाती हैं। यह पूरी तरह से पौधे को खत्म कर देता है। इस रोग से पत्तियां सूख जाती है और दाना भी छोटा हो जाता है। किसान यदि प्राथमिक चरण में इसे न देख पाए तो पूरी फसल चौपट हो जाती है।
क्या कहते हैं किसान
मैंने 60 एकड़ में मटर की फसल लगाई थी। अभी करीब 22 एकड़ में लगे मटर की फसल गेरुआ रोग की चपेट में है। दवा का छिड़काव किया जा रहा है। -राजेश पटेल, कृषक ग्राम आरछा जबलपुर।
मैंने 55 एकड़ में मटर की फसल लगाई थी। अभी 6 एकड़ में लगी फसल पर यह रोग देखने को मिला है। सलाह पर फसल के उपचार में लगे हुए हैं। -अरविन्द पचौरी, ग्राम कुआंखेडा जबलपुर।
फसलों में रोगनाशक दवा का प्रयोग करने की सलाह
मटर की फसल में गेरुआ रोग घातक होता है और तेजी से फैलता है। जिले के पाटन क्षेत्र में लगी मटर की फसल पर इसका प्रकोप देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के करीब 50 से अधिक किसानों ने अपनी-अपनी फसलों के सैंपल भेजे थे। इन फसलों के सैंपलों की जांच करने के बाद लगभग 30 प्रतिशत पर इस रोग की पुष्टि हुई है। सभी को सलाह दी गई है कि वे रोगनाशक दवा का प्रयोग करें। -ब्रजेश दत्त अरजरिया, पौध रोग विशेषज्ञ एवं कृषि सलाहकार प्रमंडल सदस्य, जेएनके विवि जबलपुर
जानकारी नहीं दी है
मटर की फसल पर गेरुआ रोग लग गया है। इसकी जानकारी किसानों ने नहीं दी है। यदि ऐसा है तो किसान कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेकर फसल का उपचार करें और विभाग को जानकारी दें, ताकि आकलन किया जा सके कि कितनी फसल प्रभावित हुई है। -डॉ. सुशील कुमार निगम, उप संचालक, कृषि विभाग जबलपुर