
शुशांत पांडे-ग्वालियर। मध्यप्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब एक जिले के 43 टीआई-एसआई एक साथ लापरवाही के चलते दोषी पाए गए हैं। इन सभी के खिलाफ शिकायत के बाद एएसपी स्तर के अधिकारियों ने जांच की थी, जिसमें पता चला कि नियमानुसार 21 उप निरीक्षक और 22 निरीक्षकों ने दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में लेटलतीफी करते हुए समय पर सैंपल जमा नहीं कराए। अब जांच पूरी होने और दोषी पाए जाने पर डीआईजी ग्वालियर ने एक साथ सभी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए हैं।
मार्च महीने तक जिले के डेढ़ दर्जन थानों के उप निरीक्षक व निरीक्षकों ने दुष्कर्म जैसे गंभीर प्रकरणों में समय सीमा (21 दिन) बीतने पर भी डीएनए सैंपल नहीं जमा कराए। डीआईजी ग्वालियर ने जांच के आदेश दिए। जांच में पाया कि 14 थानों के 43 पुलिसकर्मियों ने 90 दिन से 500 दिनों तक लापरवाही करते हुए आरोपियों का डीएनए टेस्ट नहीं कराया। इस लापरवाही के उजागर होने पर डीआईजी कृष्णावेणी देशावतु ने सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
इन थानों के लापरवाह विवेचकों की हो रही जांच
लेटलतीफी कर समय पर डीएनए टेस्ट नहीं कराने वालों में थाटीपुर, विवि, माधौगंज, भितरवार, डबरा सिटी, बिलौआ, आंतरी, महाराजपुरा, ग्वालियर , इंदरगंज, बहोड़ापुर, महिला थाना, पड़ाव व पुरानी छावनी के 21 उपनिरीक्षक एवं 22 निरीक्षक एएसपी स्तर की जांच में दोषी पाए गए हैं। जिन्होंने दुष्कर्म के 19 प्रकरणों में 90 से 500 दिनों तक की लापरवाही बरती थी।
लेटलतीफी से आरोपियों को मिलता है फायदा
दुष्कर्म के प्रकरणों में ब्लड सैंपल की 21 दिन के भीतर जांच नहीं होने पर आरोपियों को इस कोताही का फायदा मिलता है और बाद में सैंपल में लिए जाने वाले शुक्राणु मर जाते हैं। आंतरी थाना पुलिस ने तो लापरवाही की हदें ही पार कर दीं, यहां के विवेचकों ने 2023 के एक प्रकरण में आरोपी का ब्लड सैंपल ही नष्ट कर दिया।
जांच कराई गई थी
दुष्कर्म के गंभीर मामलों में लेटलतीफी करने वाले विवेचकों की जांच कराई गई थी, जिसमें वह दोषी पाए गए। विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। -कृष्णावेणी देशावतु, डीआईजी