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25 साल में 40 से ज्यादा कलेक्टर आए पर किसानों को जमीन छोड़ने नहीं मना पाए

डिंडोरी-अनूपपुर नर्मदा सिंचाई बांध प्रोजेक्ट ‘डूब’ में...

भोपाल। मध्यप्रदेश के डिंडोरी और अनूपपुर की सीमा में प्रस्तावित नर्मदा अपर सिंचाई बांध परियोजना का निर्माण 45 साल बाद भी उलझा है। दोनों जिलों में अकेले 25 साल में 40 से ज्यादा कलेक्टर आए और गए फिर भी रास्ता नहीं निकाल पाए। इस परियोजना को वर्ष 1979 से अस्तित्व में लाया गया लेकिन अब तक बांध निर्माण के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगी। इसका एक कारण ये भी है कि दोनों जिलों के किसान बांध निर्माण विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे करीब डेढ़ लाख आदिवासियों की जमीन डूब में जाने का खतरा है।

इसके लिए किसान कई बार विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। किसानों ने अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाई है। इधर, प्रदेश में पेसा एक्ट लागू होने से नई समस्या खड़ी हो गई है कि आदिवासी बहुल गांवों का विस्थापन बिना ग्रामसभा की अनुमति के नहीं किया जाएगा। लिहाजा एक हजार करोड़ से अधिक लागत की परियोजना ठप है।

प्रधानमंत्री कर चुके हैं भूमिपूजन: उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2023 में नर्मदा बांध परियोजना के लिए भूमिपूजन कर चुके हैं। हाल ही में दिशा की बैठक में सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा है कि जल्द ही काम प्रारंभ किया जाए।

डिंडोरी में रह चुके हैं ये कलेक्टर

वर्ष 1998 से सीएल अदमे, बीएल ठाकुर, डॉ.जेटी इक्का, केआर मंगोडिया, अशोक कुमार राय, ई. रमेश कुमार, केपी राही, बीएल कुरील, जीपी कबीरपंथी, बी चंद्रशेखर, लोकेश कुमार जाटव, जीवी रश्मि, नागर गोजे, रघुराज एमआर, छवि भारद्वाज, अमित तोमर, मोहित बुंदस, सुरभि गुप्ता, वक्की कार्तिकेय, रत्नाकर झा, विकास मिश्रा। वर्तमान में हर्ष सिंह कलेक्टर हैं।

अनूपपुर में ये आईएएस रहे : वर्ष 2018 से चंद्रमोहन ठाकुर, अनुग्रह पी, अजय शर्मा, आलोक कुमार सिंह, नरेन्द्र परमार, सोनिया मीना, आशीष वशिष्ठ। वर्तमान में हर्ष पंचोली कलेक्टर हैं।

45 हजार हेक्टेयर जमीन होगी सिंचित: रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना बरगी हिल्स जबलपुर के मुख्य अभियंता के अनुसार परियोजना पूरी होने पर 45,600 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी ।

बांध निर्माण में सबसे बड़ा पेंच

नर्मदा नदी पर 34 मीटर ऊंचे बांध का निर्माण प्रस्तावित है। अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ के विधायक फुंदेलाल मार्को कहते हैं कि दोनों जिलों के आदिवासी किसान तय स्थान पर बांध निर्माण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अकेले पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ही 70 हजार आदिवासी विस्थापित किए जाएंगे। विधायक फुंदेलाल मार्को कहते हैं कि पहले बांध रीनाटोला में बनना था लेकिन बाद में इसे शोभापुर में कर दिया। लोगों की मांग है कि चार-पांच छोटे बांध बनाए जाएं। मार्को के अनुसार परियोजना की लागत करीब 1,700 करोड़ है।

ग्रामीण पीएम तक भेज चुके ज्ञापन

हरि सिंह मरावी, हरीश मरकाम, इंद्रपाल मरकाम, ददन सिंह धुर्वे, शालिगराम धुर्वे, अनिल वनवासी, कमल सिंह धुर्वे आदि किसान इस संबंध में राष्ट्रपति, राज्यपाल, अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष, मुख्यमंत्री आदि को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उनका कहना है कि बांध बन जाने से हम विस्थापित हो जाएंगे तो हमारे बाल बच्चे कहां जाएंगे। लोगों का सीधा सवाल है कि परियोजना बनी तो हम कहां जाएंगे।

जानिए… कब क्या हुआ

  • 1979 डिंडोरी-अनूपपुर नर्मदा सिंचाई बांध प्रोजेक्ट अस्तित्व में आया
  • 2021 केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद योजना को नए बजट के साथ प्रस्तावित किया गया ।
  • 2023 में पीएम नरेंद्र मोदी ने भूमिपूजन किया।
  • 2023 भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की गई।

मेरे समय में प्रशासकीय मंजूरी नहीं मिली थी

मैं वर्ष 2006-07 में कलेक्टर था। मामला पुराना है। धुंधला सा याद है कि मेरे समय में परियोजना को प्रशासकीय स्वीकृति नहीं मिली थी। -केपी राही, पूर्व कलेक्टर

सर्वे कार्य प्रारंभ किया जाएगा

हाल ही में दिशा की बैठक हुई है। सांसद ने प्रोजेक्ट को गति देने की बात कही है। इसी क्रम में सर्वे का कार्य जल्द प्रारंभ किया जाएगा। लागत की वास्तविक जानकारी नहीं है। -हर्ष सिंह, कलेक्टर, डिंडोरी

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