
टोरंटो। मार्क कार्नी को लिबरल पार्टी का नया नेता चुना गया है, जिससे वे कनाडा के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्होंने 85.9% वोटों के साथ पार्टी की अंदरूनी चुनावी दौड़ में पूर्व वित्त मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड, पूर्व सरकारी सदन नेता करीना गोल्ड और पूर्व सांसद फ्रैंक बेलिस को हराया। यह पहली बार होगा जब कोई बिना किसी विधायी या कैबिनेट अनुभव के प्रधानमंत्री बनेगा। वह मौजूदा कनाडा पीएम जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे।
जस्टिन ट्रूडो ने दिया विदाई भाषण
कनाडा के निवर्तमान प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने पार्टी और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “मुझे गलत मत समझिए, पिछले 10 सालों में हमने जो कुछ किया है, उस पर मुझे गर्व है, लेकिन आज की रात हमारे भविष्य के बारे में है।”
उन्होंने अपने समर्थकों से सक्रिय और एकजुट रहने की अपील की। ट्रूडो ने कहा कि यह कनाडा के लिए नेशन-डिफाइनिंग मूमेंट है और लोकतंत्र को बचाने के लिए साहस, बलिदान और कड़ी मेहनत की जरूरत होगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि पिछले 10 सालों की उपलब्धियों को लेकर संतुष्ट होने के बजाय, अगले 10 सालों में और बड़े लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।
मार्क कार्नी को है बैंकिंग और अर्थशास्त्र का अनुभव
मार्क कार्नी का राजनीति में अनुभव नहीं है, लेकिन वे एक जाने-माने अर्थशास्त्री और पूर्व केंद्रीय बैंकर हैं। 2008 में उन्हें बैंक ऑफ कनाडा का गवर्नर नियुक्त किया गया था। कनाडा को आर्थिक मंदी से बाहर निकालने में उनकी भूमिका के कारण 2013 में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने उन्हें गवर्नर बनाया। बैंक ऑफ इंग्लैंड के 300 साल के इतिहास में वे पहले गैर-ब्रिटिश नागरिक थे, जिन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने 2020 तक इस पद पर रहते हुए कई अहम आर्थिक फैसले लिए, खासतौर पर ब्रेग्जिट संकट के दौरान। उनके आर्थिक अनुभव और संतुलित स्वभाव को देखते हुए कई लोगों को उम्मीद है कि वे कनाडा की वर्तमान आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतरीन कदम उठा सकते हैं।
ट्रम्प के आलोचक, लेकिन बयान देने से बचते हैं
मार्क कार्नी को डोनाल्ड ट्रम्प का आलोचक माना जाता है, लेकिन वे इस मुद्दे पर बहुत अधिक खुलकर नहीं बोलते। उनका मानना है कि ट्रम्प की नीतियों ने कनाडा को नुकसान पहुंचाया है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि ट्रम्प की धमकियों से पहले ही देश की हालत खराब थी। कई कनाडाई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और अप्रवासियों की बढ़ती संख्या से हालात और बिगड़ गए हैं। हालांकि, वे ट्रम्प के उस बयान पर चुप रहे, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कही थी।
लेकिन जब ट्रम्प ने कनाडा पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया, तब कार्नी ने कहा, “कनाडा किसी दबंग के आगे नहीं झुकेगा। हम चुप नहीं बैठेंगे। हमें एक मजबूत रणनीति बनानी होगी, जिससे निवेश बढ़े और कनाडाई कामगारों को इस मुश्किल समय में सहायता मिले।”
मार्क कार्नी के सामने कनाडा की बिगड़ती अर्थव्यवस्था, महंगाई और अमेरिका के साथ तनावपूर्ण व्यापारिक संबंधों जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। उनका मुख्य फोकस आर्थिक स्थिरता और निवेश बढ़ाने पर रहेगा। उन्होंने कनाडाई कामगारों की स्थिति सुधारने और महंगाई नियंत्रित करने का वादा किया है। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा की साख मजबूत करने पर भी जोर देंगे।