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डायवर्सन से खसरे तो टूट रहे, पर नक्शे में बदलाव नहीं!

तकनीकी खामी का फायदा उठाएंगे कॉलोनाइजर, बिना डायवर्सन बेचेंगे प्लॉट, भूखंड में होगी गफलत

ग्वालियर। नए डायवर्सन मॉडयूल में नक्शा तरमीम (सुधार ) की पुरानी गलतियां दोहराई जा रही हैं। इससे सर्वे नंबर पर मौजूद खसरे तो टूट रहे हैं, लेकिन नक्शे में संशोधन नहीं हो रहा है। इसका फायदा बिना डायवर्सन कराए प्लॉट बेच रहे भू माफिया उठा रहे हैं। प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी के अनुसार एक सर्वे नंबर पर कई भूखंड धारक होने पर अगर किसी एक ने डायवर्सन कराया तो नंबर दो हिस्सों में बंट जाता है। नक्शे में यह संशोधन नहीं दिखता। इससे भविष्य में परेशानियां बढ़ेंगी।

प्रमाणित करना बनेगा विवाद का कारण

कोई भी अगर किसी अन्य के भूखंड पर दावा करे तो भूखंड स्वामी यह प्रमाणित नहीं कर पाएगा कि सर्वे नंबर में उसका भूखंड कौन-सा है। कारण यह है कि बगैर डायवर्सन के बेची भूमि में अगर किसी एक हिस्सेदार ने डायवर्सन करा लिया तो सर्वे नंबर में उसका नाम चढ़ जाएगा। नक्शा तरमीम न होने पर अन्य नाम भी दिखेंगे। ऐसे में भूखंड धारक खसरे के नक्शे में यह चिन्हित नहीं कर सकेगा कि उसका भूखंड कौन-सा है।

ऐसे समझें नक्शा तरमीम

सर्वे नंबर के खसरा में डायवर्सन से पहले बटांकन कराने के बाद नक्शे में अलग से डाली लाइन को नक्शा तरमीम कहते हैं। नियमानुसार दो बिस्वा भूमि से कम का डायवर्सन नहीं किया जा सकता। अभी डायवर्सन मॉडयूल में आधा बिस्वा भूमि को भी डायवर्ट कर नंबर को तोड़ा जा रहा है। ऐसी स्थिति में टूटे हुए नंबर नक्शे से लिंक नहीं हो सकेंगे।

कॉलोनाइजर को ऐसे फायदा

किसी कॉलोनाइजर ने 4 बीघा भूमि पर कॉलोनी विकसित की तो वह 3 बीघा का ही डायवर्सन कराता है। अगर नक्शे में लाइन डालने की अनिवार्यता होती तो पूरी भूमि का डायवर्सन कराना पड़ता।

भविष्य में समस्या होगी

नए डायवर्सन मॉडयूल सिंगल डायवर्सन वाले सर्वे नंबर में सह कृषकों के नाम अपने आप दिखने लगते हैं। यह तय करें कि सर्वे नंबर का डायवर्सन होने से पहले बटांकन हो और नक्शे में दर्ज किया जाए, ताकि भूमि की आसानी से पहचान हो सके। -अश्विन सैनी,अध्यक्ष प्रांतीय पटवारी संघ

खामियां दूर कर रहे हैं

राजस्व महाभियान में नक्शा तरमीम प्राथमिकता के आधार पर हो रहा है। इसके तकनीकी पक्ष भी हम समझ रहे हैं। पुराने खसरों में जो खामियां थीं , वे भी दूर कराई जा रही हैं। राजस्व दस्तावेज ऑनलाइन देखने में इससे आसानी रहेगी। -गुंचा सनोबर, अपर आयुक्त, लैंड रिकार्ड

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