महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज, इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र

केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए एक बार फिर संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस दौरान लोकसभा की सीटें बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश किए जा सकते हैं। सरकार की कोशिश इन विधेयकों को संसद से पास कराने की है। इससे पहले अप्रैल में हुई कोशिश सफल नहीं हो पाई थी। अब सरकार बहुमत जुटाने के लिए छोटे दलों से बातचीत कर रही है।
इसी महीने बुलाया जा सकता है विशेष सत्र
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इसकी जानकारी सत्र शुरू होने से करीब एक हफ्ते पहले दी जा सकती है। इस सत्र में तीन अहम विधेयक पास कराने की तैयारी है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इन विधेयकों का मकसद लोकसभा की सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
लोकसभा और राज्यसभा में कितने वोटों की जरूरत?
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। इसके लिए सरकार को अपने मौजूदा सहयोगियों के अलावा कुछ अन्य दलों का समर्थन भी चाहिए।
लोकसभा में 360 वोट जरूरी
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, जिनमें से 3 खाली हैं। NDA के पास 318 सांसद बताए गए हैं। विधेयक पारित कराने के लिए 360 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार को अतिरिक्त सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, DMK के 22 सांसदों का समर्थन मिलने पर भी सरकार को करीब 20 और सांसदों की जरूरत पड़ सकती है।
राज्यसभा में भी जुटाना होगा समर्थन
राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं, जिनमें से 3 खाली हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, NDA के पास 153 सांसद हैं, जबकि विधेयक पारित कराने के लिए 162 वोटों की जरूरत होगी। इस तरह सरकार को राज्यसभा में भी छोटे दलों के कम से कम 9 सांसदों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
पिछली बार क्यों गिर गया था बिल?
सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा और मंजूरी के लिए 15 से 17 अप्रैल तक विशेष सत्र बुलाया था। हालांकि, लोकसभा में विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। उस समय 528 सांसदों ने मतदान किया था। इनमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया था। 528 मतों के आधार पर दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 वोट जरूरी थे। इस तरह विधेयक को 54 वोट कम मिले और वह पारित नहीं हो सका।
अब क्या बदलेगा? इन दलों पर सरकार की नजर
पिछले सत्र के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की खबरें सामने आई हैं। सरकार अब समर्थन जुटाने के लिए अलग-अलग दलों से बातचीत कर रही है।
DMK: पार्टी के समर्थन को लेकर सरकार बातचीत की कोशिश कर रही है। तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस और DMK के रिश्तों में बदलाव की खबरें भी सामने आई हैं।
TMC: पार्टी में टूट और सांसदों के दूसरी पार्टी में शामिल होने से जुड़े दावे किए जा रहे हैं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
शिवसेना (UBT): पार्टी के कुछ सांसदों के अलग गुट बनाने और NDA का समर्थन करने की खबरें सामने आई हैं। इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सरकार की कोशिश है कि छोटे दलों और अन्य सांसदों का समर्थन हासिल करके दोनों सदनों में जरूरी संख्या पूरी की जा सके।
मानसून सत्र के बाद अब तक सत्रावसान नहीं
संसद के मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी। इसके बाद भी दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा के सत्रावसान के बिना रहने की यह असामान्य रूप से लंबी अवधि है। इससे पहले 1989 में दोनों सदन 63 दिनों तक ऐसी स्थिति में रहे थे।
महिला आरक्षण पर अब आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम और संसद के संभावित विशेष सत्र पर है। अगर सरकार दोनों सदनों में जरूरी बहुमत जुटा लेती है, तो महिला आरक्षण और लोकसभा की सीटों में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, विधेयकों की वास्तविक स्थिति, संसद में उनकी मंजूरी और लागू होने की समयसीमा सरकार के आधिकारिक फैसलों और संसदीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।




















