सोहागपुर में स्वच्छता अभियान पर उठे सवाल, नागरिक बोले- सेवा सिर्फ फोटो तक सीमित न रहे

सोहागपुर। प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सोहागपुर में आयोजित सेवा एवं स्वच्छता कार्यक्रम को लेकर नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। पलकमती नदी के घाट पर आयोजित सफाई अभियान को लेकर नागरिकों का कहना है कि राष्ट्र सेवा और समर्पण केवल आयोजन, बैनर और फोटो तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका वास्तविक असर धरातल पर दिखाई देना चाहिए।
एक दिन पहले ही सफाई कराने का दावा
नागरिकों के अनुसार, पलकमती घाट पर आयोजित सफाई अभियान से एक दिन पहले ही नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा घाट की सफाई कराई जा चुकी थी। इसके बाद कार्यक्रम के दिन जनप्रतिनिधि घाट पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने दस्ताने और मास्क पहनकर कुछ देर झाड़ू लगाई और सफाई अभियान से जुड़ी तस्वीरें भी खिंचवाईं।
इसी को लेकर स्थानीय नागरिकों ने आयोजन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि जिस स्थान पर सफाई अभियान आयोजित किया जाना है, वहां पहले ही सफाई कर दी जाए और कार्यक्रम के दिन केवल औपचारिक रूप से झाड़ू लगाई जाए, तो ऐसे आयोजन का वास्तविक उद्देश्य क्या रह जाता है?
पलकमती नदी के संरक्षण की मांग
नागरिकों का कहना है कि पलकमती नदी सोहागपुर की महत्वपूर्ण और जीवनदायिनी नदी है। ऐसे में केवल किसी विशेष अवसर पर सफाई अभियान चलाने के बजाय नदी और उसके घाटों की नियमित सफाई की आवश्यकता है। इसके साथ ही नदी में गंदगी रोकने, अतिक्रमण हटाने और नदी संरक्षण के लिए भी लगातार ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों से की अपील
स्थानीय लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता ने नगर का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना है। इसलिए उनसे अपेक्षा है कि वे दिखावे से आगे बढ़कर ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दें, जिनका जनता को लंबे समय तक लाभ मिल सके। नागरिकों का कहना है कि सेवा और राष्ट्र समर्पण का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब उसके परिणाम जमीन पर दिखाई दें। उनका सवाल है कि यदि स्वच्छता अभियान केवल निर्धारित कार्यक्रम के दौरान कुछ समय झाड़ू लगाने और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह जाए, तो इससे नई पीढ़ी को सेवा और जिम्मेदारी का क्या संदेश मिलेगा?
अब सवाल यह है कि पलकमती नदी और उसके घाटों की स्वच्छता एवं संरक्षण के लिए आगे कोई नियमित और ठोस पहल होती है या यह अभियान भी एक दिवसीय आयोजन बनकर रह जाता है।




















