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लाखों रु. सैलरी दे रहे और काम बाबू लेवल का भी नहीं

बिना काम बैठे सीनियर IPS - कहीं पद खाली, तो कहीं ज्यादा पदों का प्रभार
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लाखों रु. सैलरी दे रहे और काम बाबू लेवल का भी नहीं
विजय एस. गौर-भोपाल। पुलिस महकमे में कार्य विभाजन को लेकर अजीबोगरीब स्थिति है, जहां एक ओर एक विशेष पुलिस महानिदेशक या अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के पास सालों से कोई ढंग का काम नहीं है तो वहीं कई एक से ज्यादा जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। कई पद खाली भी पडे हैं। ऐसे में बिना काम के बैठे सीनियर आईपीएस डेपुटेशन पर केंद्र जाने के लिए प्रयासरत हैं। एक एडीजी ने यहां तक कह दिया कि लाखों रु. सैलरी दे रहे हैं और काम बाबू तक का नहीं...। परिवहन और पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन में दो-दो एडीजी स्तर के अधिकारी पदस्थ हैं। जहां परिवहन में आयुक्त परिवहन देवप्रकाश गुप्ता हैं तो वहीं अतिरिक्त आयुक्त के पद पर उमेश जोगा पदस्थ हैं। पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन में चेयरमैन कैलाश मकवाना हैं तो प्रबंध संचालक उपेंद्र कुमार जैन हैं। हालांकि दोनों ही जगह दूसरे नंबर की पोस्ट पर आईजी की ही पोस्टिंग रहती आई है।

प्रमोशन, फिर भी कमतर पदों पर

प्रमोशन के बाद भी कमतर पदों पर कई आईपीएस अफसरों की पोस्टिंग हैं, जैसे एडमिन स्पेशल डीजी विजय कटारिया हैं, लेकिन यह पोस्ट एडीजी की है। इसी तरह 30 अगस्त तक आईजी शहडोल के पद पर एडीजी डीसी सागर पदस्थ रहे हैं। बीते दिन एडीजी महिला सुरक्षा प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की पदोन्नति होकर स्पेशल डीजी हो गई हैं, लेकिन उनकी पोस्टिंग ज्यों की त्यों रखी गई है।

ADG के यह पद हैं खाली

स्पेशल डीजी संजय कुमार झा के रिटायरमेंट के बाद से यह पद खाली है। इसी तरह एडीजी बीबी शर्मा के रिटायरमेंट के बाद से मानव अधिकार आयोग में पद खाली पड़ा है। स्पेशल डीजी प्रबंध का पद आईपीएस आलोक रंजन के रिटायरमेंट के बाद से खाली है तो लोक अभियोजन स्पेशल डीजी सुषमा सिंह के रिटायरमेंट के बाद से खाली हो गया है।

पढ़िए अफसरों की झुंझलाहट

सीनियर आईपीएस अफसरों में प्रमोशन के बाद पीएचक्यू के एक कमरे में सालों बिना काम के गुजारने को लेकर नाराजगी है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सीनियर आईपीएस ने कहा कि एडीजी प्रमोट होने के बाद भी उनके पास हफ्ते भर में शायद ही एक-दो फाइलें आती हो, जिससे बेकार बैठे रहने से डिप्रेशन बढ़ने लगा था। हालांकि बाद में केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर चले गए और फिलहाल सेंट्रल फोर्सेस में आईजी के पद पर हैं। एक अन्य एडीजी कहते हैं कि लाखों की सैलरी के बाद भी बाबू लेवल तक का काम नहीं है। ऐसे दो सीनियर आईपीएस और हैं, जो पीएचक्यू में बिना काम के बैठे हैं।

इनके पास है एडिशनल चार्ज

एडीजी वेलफेयर अनिल कुमार के पास एसआईएसएफ (स्टेट इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) का एडिशनल चार्ज है। इसी तरह डेपुटेशन से वापस लौटीं एडीजी सोनाली मिश्रा की पदस्थापना प्रशिक्षण में होने के साथ ही उनके पास जेएनपीए सागर और भौंरी ट्रेनिंग संस्थान का अतिरिक्त प्रभार है।

वर्क डिस्ट्रीब्यूशन समान हो

अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करके आईपीएस बनने वालों के लिए पद स्वीकृत हैं और प्रमोशन भी दिया गया है। ऐसे में सभी अफसरों में बराबर से कार्य विभाजन होना चाहिए, आखिर उनको पदोन्नति के बाद बढ़ा हुआ वेतन दिया जा रहा है तो उनको उसी अनुसार काम भी मिलना चाहिए। -शैलेष सिंह, स्पेशल डीजी, पुलिस रिफॉर्म, पीएचक्यू
People's Reporter
By People's Reporter

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