
कुल्लू। हिमाचल में अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में शुक्रवार देर रात देवी-देवताओं के लिए बनाए पंडाल में भीषण आग लग गई। इससे देवी-देवताओं के 6 टेंट सहित कुल 13 टेंट और पांच दुकानें जलकर राख हो गईं। इसमें लाखों रुपए के नुकसान का अनुमान है। आग बुझाते समय 2 व्यक्ति इसकी लपटों की चपेट में आकर झुलस गए, जिनका इलाज चल रहा है। वहीं कुछ देवी-देवताओं के सोने व चांदी के आभूषण भी जलने की सूचना है।
कैसे लगी आग
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार देर रात करीब दो से तीन बजे के बीच भड़की आग से पूरे ढालपुर में अफरातफरी का माहौल रहा। आग लगने से देवी-देवताओं के टेंट और कुछ दुकानें जलकर राख हो गईं। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाया। आग कैसे लगी इसका खुलासा नहीं हुआ है।
आग की इस घटना में एक गाड़ी के भी जलने की सूचना है। वहीं 13 देवताओं के टेंट और पांच दुकानें जल गईं हैं। दो लोगों के झुलसने की भी खबर है। आग में देवी देवताओं के वाद्य यंत्र जलकर राख हो गए हैं।
देवी-देवताओं का कीमती सामान जलकर राख
देवी-देवताओं के साथ देवलुओं के सोने के लिए बनाए गए टेंट भी जल गए हैं। इसके अलावा देवी देवताओं की चांदी, लकड़ी की अर्लगलाएं, दानपात्र, ढोल, नगाड़े, नरसिंगे, ट्रंक सहित अन्य सामान जलकर राख हो गया है। देवी-देवताओं के टेंट के साथ पार्क एक कार भी जल गई है। जिन देवी-देवताओं के टेंट जल गए हैं, उन्हें अभी कोर्ट परिसर में खुले आसमान के नीचे रखा रखा है।
कुल्लू में 30 अक्टूबर तक चलेगा दशहरा पर्व
देश-दुनिया में दशहरा विजय दशमी के दिन ही खत्म हो गया है। लेकिन देवभूमि हिमाचल के कुल्लू में विजय दशमी से दशहरा पर्व की शुरुआत हुई, जो 30 अक्टूबर तक चलेगा। बताया जाता है कि, आयोध्या से भगवान रघुनाथ की मूर्ति विजय दशमी वाले दिन ही कुल्लू लाई गई थी। इसलिए विजय दशमी के अवसर पर सात दिन चलने वाला यह पर्व शुरू होता है। साल 1656 से यह परंपरा चली आ रही है। यह पर्व पहले कुल्लू मकराहड़ में मनाया जाता था।
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