Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

कोसमी में आदिवासियों के घर तोड़े! आयोग का अल्टीमेटम, सरकार तीन दिन में जवाब दे, वरना अफसरों पर गिरेगी गाज

सीहोर के कोसमी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने पर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार और अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। तीन दिन में जवाब मांगा गया है।
सोमवार देर शाम उनके पुत्र कार्तिकेय चौहान भी गांव पहुंचे।

सीहोर। कोसमी में आदिवासी परिवारों के घरों पर चली सरकारी कार्रवाई अब महज स्थानीय विवाद नहीं रही। मकान तोड़ने, फसलों को नुकसान पहुंचाने और परिवारों को खुले आसमान के नीचे छोड़ने के आरोपों ने प्रशासन को राष्ट्रीय जनजाति आयोग के कठघरे में खड़ा कर दिया है। आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव समेत तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब तलब किया है।

आयोग ने अफसरों पर कसा शिकंजा

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने 12 अक्टूबर 2026 को जारी नोटिस में दैनिक भास्कर में 11 अक्टूबर को प्रकाशित खबर का संज्ञान लिया। खबर में कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला सामने आया था। शिकायत, याचिका अथवा उपलब्ध सूचना के आधार पर आयोग ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। नोटिस मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव, वन विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक, सीहोर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, पुलिस अधीक्षक सीहोर, वनमंडलाधिकारी सीहोर और राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक को भेजा गया है। अब इन अधिकारियों को कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड और अपना पक्ष आयोग के सामने रखना होगा।

तीन दिन में जवाब नहीं तो व्यक्तिगत पेशी

आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर संबंधित अधिकारियों को मामले से जुड़ी जानकारी और की गई कार्रवाई का विवरण प्रस्तुत करना होगा। अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर, डाक या अन्य संचार माध्यम से जवाब भेज सकते हैं। लेकिन आयोग ने चेतावनी भी साफ शब्दों में दी है। तय समयसीमा में जवाब नहीं मिला तो संविधान के अनुच्छेद 338क के तहत आयोग दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति के लिए समन जारी हो सकता है। यानी अब फाइल दबाने या जवाब टालने की गुंजाइश बेहद सीमित है।

मकान ढहाए, फसलें रौंदी गईं

रविवार को वन विकास निगम के अमले ने कोसमी में करीब 30 एकड़ वनभूमि पर काबिज आदिवासी परिवारों के खिलाफ बेदखली कार्रवाई की थी। कार्रवाई के दौरान मकान तोड़े गए। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि खेतों में खड़ी मक्का और अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा। सरकारी कार्रवाई के बाद कई परिवारों के सामने सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया। घर उजड़ने के साथ उनकी आजीविका पर भी सीधा प्रहार हुआ। यही वजह है कि आदिवासी परिवारों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। पीड़ितों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उनके पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और नुकसान की भरपाई पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।

शिवराज पहुंचे, नाराजगी जताई

मामले की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार शाम कोसमी पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और कार्रवाई पर नाराजगी जताई। चौहान ने पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। सोमवार देर शाम उनके पुत्र कार्तिकेय चौहान भी गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी और उन्हें ढांढस बंधाया। राजनीतिक स्तर पर बढ़ते दबाव के बीच अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल और तेज हो गए हैं।

अब प्रशासन को देना होगा पूरा हिसाब

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के नोटिस के बाद मामले की अगली दिशा अधिकारियों के जवाब पर निर्भर करेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि बेदखली कार्रवाई किस आदेश, किस प्रक्रिया और किन परिस्थितियों में की गई। क्या प्रभावित परिवारों को पर्याप्त नोटिस दिया गया था? क्या पुनर्वास की व्यवस्था की गई? फसलों और मकानों के नुकसान का आकलन किसने किया? अब आयोग के सामने प्रशासन को सिर्फ औपचारिक जवाब नहीं, बल्कि कार्रवाई का पूरा दस्तावेज रखना होगा। कोसमी के पीड़ित परिवार राहत, आवास, आजीविका और न्याय की मांग पर डटे हैं। तीन दिन की समयसीमा ने सरकार और अधिकारियों पर जवाबदेही का दबाव साफ तौर पर बढ़ा दिया है।

EDIT BY: ADITI RAWAT 

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

Latest Posts