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13 की उम्र में ही आजादी के दीवाने हो गए थे कोमलचंद

सिद्धार्थ तिवारी-जबलपुर। आजादी हमें बहुत कुछ खोने के बाद मिली है। इसे पाने के लिए कई शहीद हुए और उन्होंने अपना खून इस धरती को चढ़ाया है। पिता ने हमेशा इस बात को याद रखने को कहा। यह बात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लार्डगंज निवासी कोमलचंद जैन के बेटे शरद जैन ने पीपुल्स समाचार को चर्चा बताई।

शरद ने बताया कि उनके पिता कोमलचंद जैन ने उन्हें गांधी जी के ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ और ‘करो या मरो’ के आंदोलनों के बताया है। इस नारों के बाद ही उनके पिता आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने सड़कों पर उतर आए थे। 13 साल की उम्र में आजादी का लड़ाई की हिस्सा बने कोमलचंद जैन अब 95 वर्ष के हैं और अस्वस्थ होने के कारण बोल नहीं पाते हैं।

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