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Kapil Parmar Wins Bronze: मां ने खेतों में काटी सोयाबीन, बेटे ने जापान में जीता मेडल; सीहोर के कपिल परमार की संघर्ष भरी कहानी

सीहोर के कपिल परमार ने पैरा एशियन गेम्स 2026 में पैरा जूडो का कांस्य पदक जीता। मां ने खेतों में सोयाबीन काटकर और मजदूरी करके बेटे को पाला। जानिए कपिल की संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी।
Kapil Parmar Wins Bronze: मां ने खेतों में काटी सोयाबीन, बेटे ने जापान में जीता मेडल; सीहोर के कपिल परमार की संघर्ष भरी कहानी
कपिल परमार

सीहोर। मध्यप्रदेश के सीहोर के खिलाड़ी कपिल परमार ने जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। कपिल की इस जीत के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, हौसला और मां का वर्षों का संघर्ष छिपा है। बेटे को आगे बढ़ाने के लिए मां ने दूसरों के खेतों में सोयाबीन काटी, मजदूरी की और कंडे थापकर परिवार चलाया। आज बेटे की अंतरराष्ट्रीय सफलता ने उनकी आंखों में खुशी के आंसू ला दिए हैं। कपिल की कहानी बताती है कि मुश्किल हालात भी मजबूत इरादों के सामने हार सकते हैं।

जापान में कपिल परमार का शानदार प्रदर्शन

पैरा एशियन गेम्स 2026 में कपिल परमार ने पुरुषों की जे-1, 70 किलोग्राम भार वर्ग की पैरा जूडो स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने इंडोनेशिया के खिलाड़ी हनाफ रफली शिदकी को इप्पोन से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया। कपिल की इस उपलब्धि से सीहोर सहित पूरे मध्यप्रदेश में खुशी का माहौल है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

मां ने खेतों में की मजदूरी, बेटे ने विदेश में बढ़ाया मान

कपिल की सफलता के पीछे उनकी मां का बड़ा योगदान है। बेटे को पालने और उसके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने कठिन मेहनत की। कभी दूसरों के खेतों में सोयाबीन काटी, कभी मजदूरी की तो कभी कंडे थापकर परिवार की जरूरतें पूरी कीं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। आज जब कपिल ने जापान में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया, तो मां के वर्षों के संघर्ष को जैसे नई पहचान मिल गई। कपिल की जीत की खबर मिलते ही घर में खुशियां छा गईं। मां ने बच्चों और आसपास के लोगों को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी साझा की। उनके लिए यह पदक केवल खेल की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और त्याग का फल है।

बचपन में लगा था करंट, कोमा में चले गए थे कपिल

कपिल परमार की जिंदगी में एक ऐसा कठिन दौर भी आया, जब उनकी जान पर संकट मंडराने लगा था। उनकी मां के मुताबिक, करीब 10 से 12 साल की उम्र में खेत पर पानी पीने के दौरान कपिल को तेज करंट लग गया था। हादसा इतना गंभीर था कि वह कोमा में चले गए। उस समय उनके पिता घर पर मौजूद नहीं थे। परिवार के परिचित गजराज भैया और वकील साहब कपिल को अस्पताल लेकर पहुंचे। मां ने बताया कि रात करीब 11 बजे ड्रिप लगने के बाद कपिल को होश आया। इस हादसे के बाद परिवार को इलाज और देखभाल के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन कपिल ने जिंदगी की इस चुनौती का भी सामना किया और आगे बढ़ते रहे।

कपिल परमार की जीत पर मंत्री विश्वास सारंग ने दी बधाई

कपिल परमार की उपलब्धि पर मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि पैरा एशियन गेम्स 2026 में कांस्य पदक जीतकर कपिल ने देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। कपिल की सफलता से खेल प्रेमियों और सीहोर के लोगों में उत्साह है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत...

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