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जॉब मार्केट ही नहीं, रिश्तों में सक्सेस के लिए भी सॉफ्ट स्किल्स निखारना जरूरी

वर्ल्ड कम्युनिकेशन वीक : बदलते समय में बेहतर संवाद भी सीखना होगा

प्रीति जैन- एकेडमिक नॉलेज के साथ ही कम्युनिकेशन स्किल्स का होना हमेशा से जरूरी माना जाता रहा है और जॉब मार्केट में इस स्किल्स का खासा महत्व है। सोशल मीडिया साइट लिंक्डइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, आज के जॉब मार्केट में कम्युनिकेशन स्किल बहुत जरूरी हैं। जैसे-जैसे कम्युनिकेशन के जरिए बढ़ते जा रहे हैं, उससे लगता है कि यह स्किल्स निखर रही होगी, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्टूडेंट्स आज भी इस स्किल्स को बहुत गंभीरता से नहीं लेते। वहीं, कॉलेजों में कम्युनिकेशन स्किल्स को लेकर कोई खास मॉ़ड्यूल तैयार नहीं करवाया जाता, जिससे स्टूडेंट्स की एम्प्लॉयबिलिटी की संभावना बढ़े। कॉलेजों में आज भी मंथली या साल में कुछ सेशन एक्सपर्ट के कराए जाते हैं, लेकिन यह डे-टू-डे टास्क है, जिसमें स्टूडेंट्स के साथ रेगुलर बेसिस पर इंटरेक्ट करना होता है।

कार्यस्थल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स का उपयोग बहुत बढ़ गया है। आज टेक्नोलॉजी की मदद से अधिकतर लोग घर से काम करते हैं। टेक्नोलॉजी के कारण ही हम दुनिया भर के लोगों से जुड़ पा रहे हैं। सब कुछ बदल रहा है, हम कैसे बोलते हैं, सुनते हैं और जुड़ते हैं, अन्य लोगों के साथ यह बहुत महत्वपूर्ण होते जा रहा है। हम इस बारे में अब 10 साल के बच्चों के साथ भी काम कर रहे हैं और एक दूसरे प्रोग्राम में यंगस्टर्स के साथ कम्युनिकेशन स्किल्स पर मीट-अप इवेंट वीकली रखते हैं, ताकि आने वाले समय के लिखित और मौखिक संवाद में वे दक्षता हासिल कर सकें। – अविरल पटले, सॉफ्ट स्किल एक्सपर्ट

कम्युनिकेशन स्किल का पर्सनालिटी डेवलपमेंट में बहुत ही महत्व है। यह एक ऐसी चीज है, जिससे सामने वाला अपनी क्षमता का अंदाजा लगा लेता है। वहीं, व्यक्तिगत जीवन में भी अपनी बात सही समय और सही ढंग से प्रस्तुत न कर पाने पर गलतफहमियां बनी रहती हैं और बात न कर पाना दरार पैदा करता है। कई बार रिश्ते इसलिए नहीं चल पाते क्योंकि दो लोग सही तरह से अपने आप को एक्सप्रेस नहीं कर पाते, लेकिन जब वे एक्सपर्ट के साथ बैठते हैं तो पता चलता है कि ऐसा कोई मुद्दा ही नहीं था कि दो लोगों के बीच दरार आए, बस कई बार अंहकार व सही तरीके से बातचीत न करने पर बात बंद हो जाती है। – सोनम छतवानी, साइकॉलोजिस्ट

मैं कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ सालों से काम कर रहा हूं। कई कॉलेज कम्युनिकेशन स्किल्स को लेकर बहुत सजग हैं, लेकिन बाकी डिग्री कॉलेज में स्टूडेंट्स के पास इस बारे में सही गाइडेंस नहीं होता। ऐसे स्टूडेंट्स तकनीकी रूप से दक्ष होने के बाद भी इंटरव्यू में मात खा जाते हैं, क्योंकि वे खुद के बारे में भी ठीक से नहीं बता पाते। यदि कम्युनिकेशन स्किल्स और इंग्लिश बेहतर हो तो आधा काम इंटरव्यू में हो जाता है, लेकिन मप्र के स्टूडेंट्स में इसकी खासी कमी दिखती है। कॉलेज में पहुंचने के पहले साल में ही यदि स्टूडेंट्स एम्प्लॉयबिलिटी को लेकर गंभीर हो जाएं, तो वे इन सॉफ्ट स्किल्स पर काम करना शुरू कर देंगे। – राजीव मिश्रा, कम्युनिकेशन स्किल्स एक्सपर्ट

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