
नई दिल्ली। आबकारी नीति मामले में पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर 9 विपक्षी नेताओं ने पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। पत्र में लिखा गया है कि, मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश से तानाशाही शासन में तब्दील हो गया है। चिट्ठी में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा गया है।
इन 9 नेताओं ने लिखी चिट्ठी
- बंगाल की मुख्यमंत्री और TMC चीफ ममता बनर्जी
- दिल्ली के मुख्यमंत्री और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल
- पंजाब के मुख्यमंत्री और AAP नेता भगवंत मान
- तेलंगाना के मुख्यमंत्री और BRS प्रमुख के चंद्रशेखर राव
- UP के पूर्व सीएम और सपा चीफ अखिलेश यादव
- बिहार के डिप्टी सीएम और RJD नेता तेजस्वी यादव
- एनसीपी चीफ शरद पवार
- महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे
- जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला
चिट्ठी में क्या लिखा गया है
आदरणीय प्रधानमंत्रीजी, हमें भरोसा है कि आपको आज भी लगता है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का मनमाना इस्तेमाल यह दिखाता है कि हम एक लोकतंत्र से तानाशाही में तब्दील हो गए हैं। 26 फरवरी को लंबी पूछताछ के बाद दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें गिरफ्तार करते समय उनके खिलाफ कोई सबूत भी नहीं दिखाए गए।
सिसोदियाजी के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है। यह राजनीतिक षडयंत्र के तहत की गई कार्रवाई है। उनकी गिरफ्तारी को दुनियाभर में बदले की भावना से की गई राजनीतिक कार्रवाई के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। दुनियाभर में मनीष सिसोदिया दिल्ली स्कूल एजुकेशन में बदलाव के लिए पहचाने जाते हैं। इससे इस बात को भी बल मिलता है कि भारत में लोकतांत्रिक मूल्य भाजपा शासन में खतरे में हैं।
2014 के बाद से जिन नेताओं पर भी एक्शन हुआ है, उनमें से ज्यादातर विपक्ष के ही हैं। मजेदार बात यह है कि उन विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों की जांच धीमी पड़ जाती है, जो बाद में भाजपा जॉइन कर लेते हैं। उदाहरण के लिए पूर्व कांग्रेस नेता और अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा (भाजपा) के खिलाफ ईडी और सीबीआई ने 2014 और 2015 में शारदा चिट फंड मामले में जांच बैठाई थी। हालांकि जबसे उन्होंने भाजपा जॉइन की, तब से केस आगे नहीं बढ़ा है। चिट्ठी में पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता सुवेंदु अधिकारी और मुहुल रॉय का भी जिक्र किया गया। ऐसे कई उदाहरण हैं।
चिट्ठी में उन विपक्षी नेताओं के बारे में भी बताया गया, जो इस वक्त केंद्रीय जांच एजेंसियों का सामना कर रहे हैं। इनमें लालू प्रसाद यादव (राजद), संजय राउत (शिवसेना उद्धव गुट), अजम खां (सपा), नवाब मलिक, अनिल देशमुख (एनसीपी) और अभिषेक बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस) के नाम शामिल हैं। ऐसे कई मामलों में केस या गिरफ्तारी तब हुई जब चुनाव होने वाले थे। इससे ये साफ पता चलता है कि जांच एंजेसियों के ये एक्शन पॉलिटिकली मोटिवेटिड थे।
चिट्ठी में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली जैसे राज्यों में राज्यपाल और सरकार के बीच चल रही तनातनी का भी जिक्र किया गया है। इसके अलावा इसमें अदाणी समूह का नाम लिए बिना एक विदेशी रिपोर्ट के बारे में भी कहा गया है।
सिसोदिया की रिमांड 6 मार्च तक बढ़ी
दिल्ली शराब नीति केस में गिरफ्तार पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की सीबीआई रिमांड दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार (4 मार्च) को यह फैसला सुनाया। CBI ने कोर्ट से तीन दिन के लिए उनकी कस्टडी मांगी थी। वहीं सिसोदिया की तरफ से दाखिल जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च को फैसला सुनाएगा। मनीष सिसोदिया को सीबीआइ ने 26 फरवरी को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था।
सिसोदिया को शनिवार को 5 दिन की CBI हिरासत खत्म होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया। 27 फरवरी को कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की कस्टडी में भेजा था, जो आज (4 मार्च) को पूरी हुई।
ये भी पढ़ें- कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की CBI रिमांड दो दिन बढ़ाई, जमानत अर्जी पर 10 मार्च तक फैसला सुरक्षित