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बुंदेलखंड में ‘आयातित नेताओं’ को पद-प्रतिष्ठा, खांटी भाजपाई हाशिए पर!

हालात ये कि आठवीं बार के सांसद केंद्रीय मंत्री को भी पीछे हटना पड़ा
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बुंदेलखंड में ‘आयातित नेताओं’ को पद-प्रतिष्ठा, खांटी भाजपाई हाशिए पर!

राजीव सोनी-भोपाल। सियासत में यह महज संयोग ही है कि बुंदेलखंड में इन दिनों सत्ताधारी दल भाजपा में आयातित नेताओं का राजयोग चल रहा है जबकि भाजपा के खांटी नेता हाशिए पर हैं। यह सियासी परिदृश्य संभागीय मुख्यालय सागर से लेकर छतरपुर, दमोह, पन्ना और टीकमगढ़ जैसे जिलों में भी भाजपा के मूल नेता-कार्यकर्ताओं में राजनीतिक दुख का कारण भी है।

भाजपा में आने के बाद कुछ नेताओं ने अपनी सियासी पकड़ इतनी मजबूत कर ली कि उनके विरोध के चलते केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक जैसे सीनियर को भी पीछे हटना पड़ा। उन्होंने अपना ही आदेश वापस लेकर यू टर्न ले लिया। पूर्व मंत्री मानवेंद्र सिंह और केंद्रीय मंत्री खटीक के बीच हुई खट-पट सबके सामने है।

सोमवार को पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की फेसबुक पर की गई टिप्पणी भी सियासी सुर्खियों में बनी रही। उन्हें यहां तक लिखना पड़ा कि 45 साल से भाजपा में कार्यकर्ता भाव से काम कर रहा हूं। कांग्रेस की सरकार का भय-प्रलोभन भी नहीं डिगा पाया। उस वक्त कुर्सी का मोह नहीं किया तो अब कुर्सी के लिए मोह-समझौते क्या करेंगे?

दमोह: राहुल अब लोकसभा में

दमोह जिले में भाजपा की सत्ता और संगठन में दशकों तक पूर्व मंत्री जयंत मलैया का वर्चस्व कायम रहा। लेकिन कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए राहुल सिंह लोधी अब लोकसभा में दमोह का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। विधानसभा का उपचुनाव हारने के बावजूद वह निगम अध्यक्ष बने रहे। बजट पेश करने का रिकार्ड बना चुके मलैया फिलहाल हाशिए पर हैं।

सागर की दिलचस्प तस्वीर

विधानसभा चुनाव के बाद बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय सागर जिले की तस्वीर सबसे दिलचस्प है। पुराने खांटी भाजपाई इस समय हाशिए पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के मंत्रिमंडल में गोविंद सिंह राजपूत प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके भाई हीरा सिंह राजपूत जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं। महापौर पद पर संगीता सुशील तिवारी मौजूद हैं। 2020 की सियासी उथल-पुथल के दौरान गोविंद भाजपा में शामिल हुए थे।

छतरपुर: खटीक को झुकना पड़ा

छतरपुर जिले में कांग्रेस से आए पूर्व मंत्री मानवेंद्र सिंह और उनके विधायक पुत्र कामाख्या प्रताप सिंह की आपत्ति के चलते आरएसएस की मजबूत पृष्ठभूमि वाले केंद्रीय मंत्री खटीक को झुकना पड़ा। खटीक बुंदेलखंड के सबसे सीनियर 8 वीं बार के सांसद हैं। हालांकि मानवेंद्र के साथ क्षेत्र के दूसरे विधायकों का समर्थन भी था। कांग्रेस-सपा की पृष्ठभूमि से भाजपा में शामिल हुए राजेश बबलू शुक्ला भी बिजावर विधायक हैं।

पन्ना-टीकमगढ़ में ये हाल

पन्ना जिले में 2018 के विस चुनाव में भाजपा में शामिल हुए प्रहलाद लोधी अब पवई सीट से दूसरी बार विधानसभा में है। लोधी सपा-कांग्रेस में रह चुके हैं। जिले के पूर्व विधायक शिवदयाल बागरी और फुंदर चौधरी भी भाजपा के पाले में आ चुके हैं। कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष और नपा अध्यक्ष रह चुकीं शारदा पाठक अब सत्ताधारी दल की सदस्य हैं।

आयातित नेताओं को मिल रहा पद और महत्व : महदेले

दूसरे दलों से भाजपा में आए नेता पद -प्रतिष्ठा और महत्व पा रहे हैं। उनकी तुलना में भाजपा के साथ संघर्षरत रहे पुराने खांटी एवं मूल कार्यकर्ता उपेक्षित पड़े हैं। -कुसुम सिंह महदेले , पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री

People's Reporter
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