KGF और Kantara बनाने वाली Hombale Films का बड़ा दांव, बंगाली फिल्म ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के ओवरसीज राइट्स हासिल किए

‘केजीएफ’ और ‘कांतारा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से देशभर में पहचान बनाने वाली होम्बले फिल्म्स अब बंगाली सिनेमा की एक फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने जा रही है। कंपनी ने विंडोज प्रोडक्शन की फिल्म ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स हासिल कर लिए हैं। नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक्शन, पुलिस और अपराधी के बीच संघर्ष और बंगाल की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को एक साथ पेश करती है। इस साझेदारी को बंगाली सिनेमा के लिए अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे फिल्म को भारत के बाहर भी दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
Hombale Films ने क्यों हासिल किए ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के ओवरसीज राइट्स?
होम्बले फिल्म्स भारतीय सिनेमा में बड़े स्तर की फिल्मों और लोकप्रिय फ्रेंचाइजी के लिए जानी जाती है। ‘केजीएफ’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों ने कंपनी को देशभर के दर्शकों के बीच पहचान दिलाई है। अब कंपनी ने बंगाली फिल्म ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकार हासिल करके क्षेत्रीय सिनेमा की कहानी को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस सौदे के तहत होम्बले फिल्म्स फिल्म के ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी भूमिका निभाएगी। इसका मकसद फिल्म को भारत के बाहर के बाजारों में दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर तैयार करना है।
क्या है ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ की कहानी?
‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ की कहानी में एक्शन, अपराध और पुलिस की जांच से जुड़े घटनाक्रम प्रमुख हैं। फिल्म में पुलिस और एक खतरनाक अपराधी के बीच संघर्ष देखने को मिलता है। इसके साथ बंगाल की सांस्कृतिक जड़ों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है। फिल्म का आकर्षण सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं है। इसकी पृष्ठभूमि और कहानी कहने का अंदाज इसे क्षेत्रीय सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल करता है, जो स्थानीय परिवेश और संस्कृति को बड़े पर्दे पर सामने लाती हैं। फिल्म के जरिए दर्शकों को बंगाल की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा माहौल देखने को मिलेगा। पुलिस और अपराधी के बीच टकराव कहानी में तनाव पैदा करता है, जबकि स्थानीय संस्कृति इसकी पृष्ठभूमि को खास बनाती है।
नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी की फिल्म को मिला मंच
‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ का निर्देशन नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी ने किया है। दोनों बंगाली सिनेमा में अपनी कहानी कहने की शैली के लिए पहचाने जाते हैं। इस फिल्म के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकार होम्बले फिल्म्स के पास जाने से विंडोज प्रोडक्शन को अपनी कहानी भारत के बाहर के बाजारों तक ले जाने का अवसर मिलेगा। फिल्म के ओवरसीज राइट्स हासिल किए जाने की खबर पर शिबोप्रसाद मुखर्जी ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि होम्बले फिल्म्स के चालुवे गौड़ा ने रात करीब 11:21 बजे फोन करके फिल्म के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकार हासिल करने में दिलचस्पी दिखाई थी। शिबोप्रसाद के मुताबिक, यह साझेदारी केवल विंडोज प्रोडक्शन के लिए ही नहीं, बल्कि बंगाली फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस सहयोग के लिए चालुवे गौड़ा और फिल्म वितरण से जुड़े मयंक श्रॉफ का आभार जताया।
बंगाली सिनेमा के लिए क्यों अहम है यह साझेदारी?
भारतीय सिनेमा में हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और बंगाली जैसी भाषाओं में लगातार फिल्में बनती हैं। लेकिन किसी फिल्म की कहानी को दूसरे देशों में रहने वाले दर्शकों तक पहुंचाने के लिए केवल अच्छी कहानी होना पर्याप्त नहीं है। अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क और बाजार तक पहुंच भी महत्वपूर्ण होते हैं। होम्बले फिल्म्स और विंडोज प्रोडक्शन की यह साझेदारी इसी लिहाज से ध्यान खींचती है। इससे बंगाली भाषा में बनी फिल्म को दूसरे देशों में प्रदर्शित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
विंडोज प्रोडक्शन के 25 साल पूरे होने पर खास उपलब्धि
विंडोज प्रोडक्शन वर्ष 2026 में सिनेमा के क्षेत्र में अपने 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। ऐसे समय में ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकारों को लेकर हुई यह साझेदारी कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पिछले 25 वर्षों में विंडोज प्रोडक्शन ने बंगाली कहानियों को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का काम किया है। अब होम्बले फिल्म्स के साथ जुड़ाव से कंपनी को अपनी फिल्मों के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।
KGF और Kantara के बाद होम्बले फिल्म्स की नई पहल पर नजरें
होम्बले फिल्म्स का नाम ‘केजीएफ’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों के कारण भारतीय सिनेमा में खास पहचान रखता है। ‘बहुरूपी- द गोल्डन डाकू’ के अंतरराष्ट्रीय वितरण अधिकार हासिल करना कंपनी के लिए क्षेत्रीय सिनेमा की एक और कहानी को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का अवसर है।



















