हरदा SDM के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, कोर्ट में मूल रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर सख्त हुआ न्यायालय

हरदा: मध्य प्रदेश के हरदा में न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM) के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मामला शासकीय उचित मूल्य की दुकान में राशन वितरण में कथित गड़बड़ी से जुड़ा है। न्यायालय ने संबंधित मामले का मूल राजस्व रिकॉर्ड पेश करने के लिए कई बार समन और नोटिस जारी किए थे, लेकिन अधिकारी के उपस्थित नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई।
3 नवंबर को मूल दस्तावेजों के साथ पेश करने का आदेश
न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 90 और 388 के तहत वारंट जारी किया है। थाना प्रभारी को निर्देश दिया गया है कि संबंधित अधिकारी को गिरफ्तार कर आगामी सुनवाई 3 नवंबर को मूल अभिलेखों सहित न्यायालय के सामने पेश करें। मामला शासन विरुद्ध धीरज तोमर से संबंधित है। राशन वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच और कार्रवाई से जुड़े मूल राजस्व रिकॉर्ड न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने हैं। अदालत ने दस्तावेजों की अनुपलब्धता और अधिकारी की गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया है।
राशन दुकान की जांच में सामने आई थी गड़बड़ी की शिकायत
मामले के अनुसार, हंडिया थाना क्षेत्र के उचान निवासी धीरज तोमर नयापुरा की शासकीय उचित मूल्य दुकान के विक्रेता थे। कलेक्टर के निर्देश पर 22 फरवरी 2022 को दुकान की जांच की गई थी। जांच प्रतिवेदन हरदा के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को सौंपा गया था। इसके बाद 25 फरवरी को कलेक्टर ने विक्रेता की कथित लापरवाही को लेकर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। कनिष्ठ खाद्य अधिकारी अमृता भट्ट ने तत्कालीन तहसीलदार अर्चना शर्मा के साथ दुकान का निरीक्षण किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दुकान बंद मिली और विक्रेता से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
तीन महीने का राशन नहीं बांटने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, गांव के हितग्राहियों के साथ पंचनामा तैयार किया गया था। इसमें कुछ हितग्राहियों ने दिसंबर, जनवरी और फरवरी का राशन नहीं मिलने की जानकारी दी थी। विक्रेता धीरज तोमर पर गेहूं, चावल, नमक, शक्कर और केरोसीन के वितरण में 7 लाख 4 हजार 445 की कथित गड़बड़ी के आरोप हैं। मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 407 और 409 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं 3 और 7 के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने का उल्लेख है। इसके बाद हंडिया थाना पुलिस ने प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया।




















