
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल यानी जीएमसी (GMC) से गायनेकोलॉजी विभाग में एक दिन पहले पदस्थ की गईं डॉ. अरुणा कुमार को 24 घंटे में ही हटा दिया गया। दरअसल, डॉ. अरुणा की GMC में पोस्टिंग से नाराज 75 जूनियर डॉक्टर हड़ताल कर रहे थे। इनके समर्थन में अन्य विभाग के जूडा ने भी काली पट्टी बांधकर काम किया। विरोध के चलते सरकार ने अपना फैसला बदल दिया और डॉ. अरुणा को वापस मेडिकल एजुकेशन डायरेक्टरेट भेज दिया गया है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने रद्द किया आदेश
डॉ. अरुणा कुमार को गायनिक डिपार्टमेंट का एचओडी बनाए जाने से जूनियर डॉक्टर काफी नाराज थे। इतना ही नहीं उन्होंने काम बंद करने तक की धमकी दे दी थी। विरोध के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अरुणा की नियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया गया।
सरकार को जूडा ने दिया था अल्टीमेटम
डॉ. अरुणा के वापस आने से नाराज जूडा ने सरकार को आज दोपहर दो बजे तक डॉ. अरुणा की पोस्टिंग के आदेश निरस्त करने का अल्टीमेटम दिया था। कॉलेज के 28 अलग-अलग डिपार्टमेंट में 450 जूनियर डॉक्टर हैं। जिसके बाद सभी हड़ताल पर चले गए थे।
हायर अथॉरिटी को लिखा पत्र
जूडा ने गुरुवार को काली पट्टी बांधकर इस फैसले का विरोध किया था। जूडा प्रवक्ता कुलदीप गुप्ता ने बताया कि हमने डॉ. अरुणा को हटाने के लिए डीन के अलावा अन्य हायर अथॉरिटी को भी पत्र लिखा था।
यह है मामला
दरअसल, मामला जुलाई 2023 का है। जब बाला सरस्वती (27) ने 31 जुलाई को एनेस्थीसिया के इंजेक्शन लगाकर खुदकुशी कर ली थी। वह उस वक्त 14 हफ्ते की गर्भवती थीं। सरस्वती के मोबाइल से सुसाइड नोट मिला था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि, री थीसिस मैं कभी पूरी नहीं कर पाऊंगी और ये लोग मुझे कभी जीने नहीं देंगे, चाहे कुछ भी हो जाए अगर मैं अपना खून, आत्मा और अपना सब कुछ भी दे दूं तो यह उनके लिए कभी पर्याप्त नहीं होगा।
इस मामले में डॉ. अरुणा को एचओडी के पद से 5 अगस्त को हटा दिया गया था। डॉ. अरुणा पर टॉर्चर करने का आरोप लगाया गया था। टॉर्चर की हद का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उनके साथ काम करने वाली 8 सीनियर डॉक्टर भी उनको हटाने की मांग मुख्यमंत्री, MPTA और चिकित्सा शिक्षा विभाग से कर चुके हैं। इसके अलावा, तीन स्टूडेंट अपनी डिग्री भी छोड़ चुकी हैं।
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