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दुबई के मिरेकल गार्डन की तर्ज पर ग्वालियर में बनेगा फ्लोरिकल्चर गार्डन

प्रदेश का पहला गार्डन, जिसमें गुलाब की 2 हजार वैरायटी को किया जाएगा विकसित

धर्मेन्द्र त्रिवेदी-ग्वालियर। ग्वालियर के खुरैरी की 95 बीघा भूमि पर 18 करोड़ रुपए की लागत से दुबई के मिरेकल गार्डन की तर्ज पर फ्लोरिकल्चर गार्डन बनेगा। दुबई में मिरेकल गार्डन का संचालन करने वाली ड्यूंस नेटवर्क ट्रेडिंग कंपनी ने पीपीपी मोड पर 5 करोड़ रुपए लगाने की सहमति दे दी है। यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास लंबित है।

यह पहला गार्डन होगा, जिसमें फूलों पर शोध के साथ ही टूरिस्ट्स को लुभाने के लिए कॉटेज, कैफेटेरिया, बोट क्लब, वाटर पार्क, मैरिज गार्डन और खूबसूरत लैंडस्केप भी तैयार किए जाएंगे। फ्लोरीकल्चर गार्डन के प्रस्ताव को राज्य स्तरीय मंजूरी समिति से 7 मार्च को स्वीकृति मिल चुकी है। गौरतलब है कि पूर्व में तैयार हुए प्रस्ताव में सिर्फ पॉली हाउस और बिल्डिंग आदि बनाने को ही शामिल किया गया था। जबकि अब नए सिरे पीपीपी मोड के लिए प्रस्ताव बना है।

बच सकेंगी गुलाब की विलुप्त होती किस्में

विश्व में गुलाब की 25 हजार वैरायटी थीं। इसमें से 16 हजार वैरायटी अभी बची हैं। इनमें से भारत में लगभग 5.5 हजार प्रकार की वैरायटी हैं। इनमें भी कई विलुप्ति की कगार पर हैं। भारत में सिर्फ कोलकाता में पुष्पांजलि, बेंगलुरू में कस्तूरी रंजन, खजुराहो में गुलाब गार्डन में ही गुलाब की अधिकतम वैरायटी बची हैं। अगर ये गार्डन किस्मों को तैयार करना बंद कर दें तो भारत से अधिकांश किस्में विलुप्त हो जाएंगी। फ्लोरीकल्चर गार्डन में इनमें से 2 हजार प्रकार के गुलाब की किस्मों को तैयार किया जाएगा। ग्वालियर के फ्लोरीकल्चर गार्डन के लिए उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने देश के बड़ी नर्सरियों में किस्मों की तलाश की थी।

इन फूलों की किस्में भी होंगी तैयार

हैबिस्कस की 2 सौ वैरायटी तैयार होंगी। इसके अलावा गेंदा, गुलदाउदी, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस सहित फूलों की 100 किस्में फ्लोरीकल्चर गार्डन में मौजूद रहेंगी।

दुबई का मिरेकल गार्डन विश्व में सबसे सुंदर है। इस गार्डन का संचालन कर रही कंपनी के प्रबंधन से बात हुई है। कंपनी ने सहमति दे दी है। उद्यानिकी विभाग ने 13 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। पब्लिक- प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड की स्वीकृति होने पर कंपनी 5 करोड़ रुपए लगाएगी। प्रस्ताव में यह शामिल किया गया है कि 30 वर्ष तक संचालन करने की जिम्मेदारी कंपनी की रहेगी। छात्रों को गुलाब की 2000 किस्मों पर शोध करने का मौका मिलेगा। गुलाब की सबसे पुरानी 8.5 हजार किस्मों को जानने का मौका भी मिलेगा। – एमपीएस बुंदेला, सहायक संचालक, उद्यानिकी

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