
महाराष्ट्र। आखिरकार बुधवार को महाराष्ट्र राजनीति की परिस्थितियां साफ हो गईं। विधानसभा चुनाव के नतीजे आए 11 दिन हो चुके थे, लेकिन तब से सीएम पद को लेकर संशय बना हुआ था। नतीजों में महायुति ने 230 सीटों के साथ एक तरफा जीत हासिल की थी। 149 सीटों पर भाजपा ने 132 सीटें प्राप्त की, जो महाराष्ट्र राजनीति में अभूतपूर्व है। ऐसे में देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था, लेकिन मंत्रालय के बंटवारे को लेकर पेंच फंसा हुआ था। राजनीतिक पंडितों का मानना था कि एकनाथ शिंदे हाईकमान के फैसले से खुश नहीं थे। वहीं, अजीत पवार ने फडणवीस को बतौर सीएम समर्थन दिया था। लेकिन अब परिस्थितियां साफ हो चुकी हैं।
बता दें, पीपुल्स अपडेट ने 26 नवंबर को ही दिल्ली और महाराष्ट्र के अपने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडणवीस के नाम की पुष्टी कर दी थी। हालांकि, मान-मनौवल के चलते आधिकारिक ऐलान में देरी हुई। वहीं देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद अब एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम के पद के लिए राजी हो गए हैं। वहीं, अजीत पवार ने पहले ही देवेंद्र फडणवीस को बतौर सीएम समर्थन दिया था।
महाराष्ट्र विधानसभा नतीजों के बाद की हलचल
- 23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा नतीजे आए, जिसमें महायुति ने 230 सीटों पर जीत हासिल की। जिसमें भाजपा घटक ने 132, शिवसेना (शिंदे गुट) ने 57 और NCP (अजित पवार गुट) ने 41 सीटें जीतीं। इन नतीजों के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
- इसके बाद 25 नवंबर को 1 मुख्यमंत्री और 2 डिप्टी सीएम का फॉर्मूला तय किया गया। इसके तहत गठबंधन के हर घटक के लिए 6 से 7 विधायकों पर एक मंत्री पद तय किए गए, जिसके मुताबिक भाजपा के पास 23, शिंदे गुट के पास 11 और अजित पवार की पार्टी को लगभग 10 मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी।
- 27 नवंबर को ठाणे में एकनाथ शिंदे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हमें भाजपा जो भी सीएम तय करेगी वो हमें मंजूर है। उन्होंने पीएम मोदी जो भी फैसला लेंगे, वही मंजूर होगा।
- 28 नवंबर को एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने दिल्ली में करीब ढाई घंटे तक गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मीटिंग की, जिसमें शिंदे करीब आधे घंटे तक अमित शाह से अकेले में बात की। शिंदे को डिप्टी सीएम या केंद्र में मंत्री पद का ऑफर मिला था।
- इसके बाद 29 नवंबर को महायुति की बैठक टाल दी गई। एकनाथ शिंदे तबियत खराब होने का हवाला देकर अपने पैतृक गांव सतारा चले गए। शिवसेना मुख्यमंत्री पद के बदले गृह और वित्त मंत्रालय मांग रही थी। शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा- अगर शिंदे डिप्टी सीएम का पद स्वीकार नहीं करते हैं तो पार्टी से ही दूसरा चेहरा ये पद संभालेगा।
- 1 दिसंबर को शिंदे दो दिन तक अपने पैतृक गांव सातारा में रहे। रविवार को वे सतारा के एक मंदिर में गए और कुछ देर बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कहा- चुनावी कार्यक्रमों की व्यस्तता के बाद मैं आराम करने आया था। उन्होंने उस समय भी यह कहा कि पीएम मोदी और शाह जिसे भी सीएम बनाएंगे, वो मुझे और पार्टी को स्वीकार होगा।
- 2 दिसंबर को भाजपा ने पर्यवेक्षक के रूप में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को चुना। महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने आजाद मैदान में शपथ समारोह की तैयारियों को लेकर मुआयना किया।

- 3 दिसंबर को चार दिन बाद एकनाथ शिंदे मुंबई लौटे। इसके बाद शाम को फडणवीस ने उनसे आधे घंटे की मुलाकात की। शिंदे ने शिवसेना विधायकों के साथ बैठक की।
क्यों तय नहीं हो पा रहा था सीएम फेस
महाराष्ट्र में शिंदे सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गृह और वित्त मंत्रालय के बंटवारे पर खींचतान था। डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस गृह मंत्रालय छोड़ने को तैयार नहीं थे, जबकि शिंदे गुट इसे अपने डिप्टी सीएम को देने की मांग कर रहा था। इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में भी कोई हल नहीं निकल सका।
बीजेपी गृह, राजस्व, उच्च शिक्षा, कानून, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे अहम विभाग अपने पास रखना चाहती थी। शिंदे गुट को स्वास्थ्य, शहरी विकास, सार्वजनिक कार्य और उद्योग जैसे विभाग देने का प्रस्ताव था। वहीं, एनसीपी (अजित पवार गुट) को वित्त, योजना, सहयोग और कृषि मंत्रालय देने की पेशकश की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजेपी गृह मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किसी और के हाथों में नहीं जाने देना चाहती थी, इस कारण गतिरोध बना हुआ था।
कल होगा शपथ ग्रहण समारोह, 31 मंत्रियों के शपथ लेने की उम्मीद
5 दिसंबर को मुख्यमंत्री के शपथ के साथ ही कुल 31 नेताओं को मंत्रिपद की शपथ लेने की उम्मीद है। महायुति ने सरकार गठन के लिए एक विशेष फॉर्मूला तय किया है, जिसमें एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों होंगे। भाजपा की ओर से देवेंद्र फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना तय हो चुका है।
भाजपा के ये नेता हो सकते हैं मंत्रिमंडल में शामिल
भाजपा से 19 नेताओं को मंत्रिपद दिया जा सकता है। इन नेताओं में प्रमुख नाम देवेंद्र फडणवीस, चंद्रशेखर बावनकुले, चंद्रकांत पाटिल, पंकजा मुंडे, गिरीश महाजन और आशीष शेलार शामिल हैं। इसके अलावा रवींद्र चव्हाण, सुधीर मुनगंटीवार, नितेश राणे और मंगल प्रभात लोढ़ा जैसे अनुभवी नेता भी मंत्री बनने की दौड़ में हैं। भाजपा ने अपने युवा और अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाते हुए मंत्रिमंडल में सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।

एनसीपी (पवार गुट) के ये नेता हो सकते हैं मंत्रिमंडल में शामिल
एनसीपी (पवार गुट) की ओर से 7 नेताओं को मंत्रिपद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। इनमें अजित पवार, धनंजय मुंडे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और दिलीप वाल्से पाटिल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। इसके अलावा, अदिति तटकरे और धर्मराव बाबा अत्राम जैसे युवा और क्षेत्रीय प्रभावशाली नेताओं को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है।
शिवसेना (शिंदे गुट) के ये नेता हो सकते हैं मंत्रिमंडल में शामिल
शिवसेना (शिंदे गुट) के 5 नेताओं को मंत्रिपद दिया जाएगा। इस सूची में एकनाथ शिंदे, दीपक केसरकर, उदय सामंथा, शंभुराज देसाई और गुलाबराव पाटिल शामिल हैं।
महायुति के इस गठबंधन में सत्ता और पदों का संतुलन बनाए रखने के लिए हर दल को उचित प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है।
आज राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा करेंगे पेश
भाजपा विधायकों द्वारा फडणवीस को नेता चुने जाने के बाद अब सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। दोपहर 3:30 बजे फडणवीस, शिवसेना के एकनाथ शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजित पवार राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में राज्यपाल को सरकार गठन के लिए पत्र सौंपा जाएगा।
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