
राजीव सोनी-भोपाल। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हुए देशव्यापी नुकसान के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा में हर स्तर पर चिंतन-मंथन के दौर चल पड़े हैं। एजेंडा यही है कि आपस में ज्यादा से ज्यादा समन्वय रहे। उच्च स्तर पर हुए फैसले के बाद केंद्रीय मंत्रियों को संघ के तीन दर्जन से अधिक आनुषांगिक संगठनों से संवाद-संपर्क बढ़ाने को कहा गया है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री नड्डा को भारतीय मजदूर संघ, नेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन व आरोग्य भारती जैसे संगठनों से कोऑर्डिनेशन का प्रभार सौंपा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन से लघु उद्योग भारती और हेडगेवार रुग्णालय के पदाधिकारी मेल- मुलाकात करेंगे।
विचार मंथन के बाद एकजुटता का संदेश
आरएसएस से प्रमुख पदाधिकारियों और भाजपा हाईकमान ने लंबी चर्चा के बाद दोनों के बीच एकजुटता का संदेश देने का फैसला किया है। संघ, भाजपा के लिए हमेशा की तरह मातृ संगठन और वैचारिक परिवार की भूमिका में यथावत है। यह भी कहा जा रहा है कि नड्डा ने अंग्रेजी दैनिक में इंटरव्यू के दौरान जो बात कही थी, उसमें वह कहना कुछ और चाह रहे थे पर ‘स्लिप ऑफ टंग’ के चलते कुछ और शब्द बोल गए। उनका भाव वह नहीं था जो प्रचारित हो गया। नड्डा ने भी संघ के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पब्लिक में दोनों के संबंधों को लेकर जो संदेश गया, उसकी भरपाई करने की रणनीति पर काम शुरू किया गया है।
मंत्रियों से वन-टू-वन
बताया जाता है कि केंद्रीय मंत्री आनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात कर संवादसं पर्क का सिलसिला तेज करेंगे। हाल ही में कुछ संगठनों की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात हो चुकी है। मंत्रीगण और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी विभिन्न मुद्दों पर आनुषांगिक संगठनों से वन-टू-वन चर्चा भी करेंगे। मंत्रियों के संगठनों से मिलने के कार्यक्रम भी तय किए जा रहे हैं।
परिणाम रहे चौंकाने वाले
लोकसभा चुनाव परिणाम (एनडीए- 292 और इंडी गठबंधन-234) भाजपा के लिए चौंकाने और चिंता बढ़ाने वाले रहे। उप्र और खासतौर पर अयोध्या के नतीजे से तगड़ा झटका लगा। 2019 की तुलना में इस बार एनडीए को भारी नुकसान हुआ। यूपी में वह 64 सीटों से 36 पर आ गया। इसके विपरीत इंडी गठबंधन का यहां अच्छी सफलता के साथ सियासी जनाधार बढ़ गया।