
नई दिल्ली। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को चुनावी बॉन्ड के आंकड़े तय सीमा से एक दिन पहले सार्वजनिक कर दिए। उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 12 मार्च को आयोग के साथ आंकड़े साझा किए थे। शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग को उसकी वेबसाइट पर आंकड़े अपलोड करने के लिए 15 मार्च शाम पांच बजे तक का समय दिया था। वेबसाइट में 763 पेजों की दो लिस्ट अपलोड की गई हैं। एक लिस्ट में बॉन्ड खरीदने वालों की जानकारी है। दूसरी में राजनीतिक दलों को मिलने वाले बॉन्ड का डीटेल है। इसमें पहला दस्तावेज 337 पन्ने का है जिसमें चुनावी बॉन्ड खरीदने वालों के नाम हैं। दूसरा दस्तावेज 426 का है जिमसें बॉन्ड भुनाने वालों के नाम हैं। एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट फाइल किया था। इसमें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के निर्देश के मुताबिक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी उपलब्ध जानकारी चुनाव आयोग को दे दी गई है।
जैसे आंकड़े मिले वैसे अपलोड किए
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि उसने अपनी वेबसाइट पर चुनावी बॉन्ड पर स्टेट बैंक से प्राप्त आंकड़ों को जैसा है जहां है के आधार पर अपलोड किया है। आयोग ने कहा है कि उसने इस मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार पारदर्शिता के साथ कार्य किया है।
चुनाव आयोग की अर्जी पर सुनवाई आज
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को निर्वाचन आयोग की उस अर्जी पर सुनवाई करेगा, जिसमें चुनावी बॉन्ड मामले में एक हिस्से में संशोधन का अनुरोध किया गया है। निर्वाचन आयोग ने कहा कि आदेश में कहा गया था कि सुनवाई के दौरान सीलबंद लिफाफे में उसके द्वारा शीर्ष अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों की प्रतियां निर्वाचन आयोग के कार्यालय में रखी जाएंगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसने दस्तावेजों की कोई प्रति नहीं रखी है।
पाकिस्तानी कंपनी से भी चंदा लिया :
बॉन्ड की डीटेल जारी होने के बाद सामने आया है कि एक पाकिस्तानी कंपनी ने भी बॉन्ड के माध्यम से चुनावी चंदा दिया है। यह कंपनी पाक-चाइना इकॉनॉमिक कॉरिडोर में भी कार्य कर रही है।
11अप्रैल 2023 को मेघा इंजीनियरिंग ने 100 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड किसको दिए, लेकिन एक महीने के अंदर ही उसे भाजपा की महाराष्ट्र सरकार से 14,400 करोड़ रुपए कॉन्ट्रैक्ट मिल जाता है। हालांकि, एसबीआई ने इस जानकारी में बॉन्ड के नंबर छिपा लिए हैं, लेकिन फिर भी कुछ डोनर और पार्टियों के मिलान कर के एक अनुमान लगाया जा सकता है। ज्यादातार चंदे ‘एक हाथ दे, दूसरे हाथ ले’ जैसे लग रहे हैं। – प्रशांत भूषण, वरिष्ठ अधिवक्ता
सीरम इंस्टीटयूट
ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से भाजपा को 18 अगस्त 2022 को 52.5 करोड़ चंदा ट्रांसफर किया था। सीरम को भारत सरकार की ओर से कोविड के टीकों का भारी भरकम ऑर्डर मिला। – आवेश तिवारी
सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ
इलेक्शन कमीशन ने जैसे ही बॉन्ड डेटा वेबसाइट पर अपलोड किया यह सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। ट्रेंडिंग सेक्शन में टॉप पर था #ElectoralBondCase
- टॉप टेन डोनर
- फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज
– 1368 करोड़ - मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा. लि.
– 966 करोड़ - क्विक सप्लाई चेन प्राइवेट लि.
– 410 करोड़ - वेदांता लि. – 400 करोड़
- हल्दिया एनर्जी लि. – 377 करोड़
- भारती ग्रुप – 247 करोड़
- एस्सेल माइनिंग – 224 करोड़
- वेस्टर्न यूपी पॉवर ट्रांसमिशन कं.
लि. – 220 करोड़ - केवेंटर फूड पार्क – 194 करोड़
- मदन लाल लि. – 185 करोड़
पार्टियां जिनको सबसे ज्यादा चंदा मिला
पार्टी बॉन्ड की राशि
भाजपा 6,060
टीएमसी 1,609
कांग्रेस 1,421
भारत राष्ट्रीय समिति 1,214
बीजू जनता दल 775
डीएमके 639
वाईएसआर कांग्रेस 337
तेलगुदेशम 218
शिवसेना 158
राष्ट्रीय जनता दल 72